एक भावुक गुरुजी थे । उनके बहुत सारे शिष्य थे । करोना काल में जब लॉकडाउन लगा, तब सब कुछ बंद हो गया ! लोग घरों में बैठकर उबने लगे और धीरे-धीरे समाज अवसाद की तरफ बढ़ने लगा ।
तब गुरु जी ने विचार किया कि क्यों न ऑनलाइन क्लास शुरू किया जाए ।
गुरुदेव ने ऑनलाइन क्लास शुरू की ।
और लोगों को “शैव जीवन पद्धति” के अनुरूप “ध्यान साधना” सिखलाई ।
जिससे समाज के बहुत से लोगों को बहुत लाभ हुआ ।
लेकिन इन्हीं शिष्यों में कुछ शिष्यों का एक समूह ऐसा भी था । जो गुरु जी को धोखा दे रहा था ।
ऑनलाइन क्लास के नाम पर वह 10-20 लोगों का पैसा इकट्ठा करके थोड़ी मात्रा में पैसा संस्थान में देकर गुरु जी की भावुकता का लाभ उठा कर बहुत बड़ी रकम अपने पास रख लेता था ।
इसी तरह पूजा अनुष्ठान के नाम पर भी समाज में लाखों रुपये इकट्ठे कर रहा था, जबकि संस्थान में मात्र 3100 या 11000 रुपये देकर बड़े बड़े लोगों के अनुष्ठान करवा लेता था ! जबकि समाज से सवा सवा लाख तक गुरु जी के नाम पर ले लेता था !
गुरु जी क्योंकि कोई यात्रा नहीं करते थे, न ही किसी शिष्य से अनावश्यक मिलते थे ! अत: यह रहस्य 3 साल तक रहस्य ही बना रहा । जिसमें इन धोखेबाज शिष्यों ने संस्थान के नाम पर कई लाख रुपये कमाये !
लेकिन जब इस बात की जानकारी विभिन्न सूत्रों से गुरु जी को हुई । तब गुरु जी ने अनेक बार क्लास में इशारे में कहा कि “वह शिष्य ही क्या, जो गुरु को धोखा न दे” ।
लेकिन गुरु के नाम पर शिष्यों का यह लूटपाट का कार्यक्रम फिर भी आगे चलता रहा ।
अत: गुरुदेव ने क्लास बंद करने का निर्णय लिया और स्वयं योग्य शिष्यों की तलाश में जनसंपर्क यात्रा आरम्भ की और अपने सभी शिष्यों से मिलने लगे ।
तब इन बेईमान शिष्यों का वह समूह जिसने गुरुदेव के नाम पर समाज से मोटी रकम वसूली थी ! उन शिष्यों के मध्य खलबली मच गई ।
तब इन शिष्यों ने एक डिजिटल समूह बनाकर गुरु जी की यात्रा का विरोध करना शुरू कर दिया ।
इन धूर्त शिष्यों ने सामान्य शिष्यों को भी व्यक्तिगत फोन करके और समूह बनाकर गुरु के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया । विधिवत गुरुविरोधियों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बना गया और अनर्गल प्रचार शुरू किया गया ! जिससे गुरुदेव की जन संपर्क यात्रा असफल हो सके !
जिससे जिन लोगों से ऐसे धूर्त शिष्यों ने अधिक पैसे ले रखे थे, वह रहस्य रहस्य ही बना रहे !
लेकिन अन्य गुरुदेव के समर्पित शिष्यों ने गुरुदेव की इस जन संपर्क यात्रा में बढ़ चढ़ कर भाग लिया और आज भी यह यात्रा अपने सफलता के साथ आगे बढ़ रही है !!
विशेष आग्रह :- जो नये या पुराने साथी संस्थान से जुड़ना चाहते हैं, वह कृपया सीधे संस्थान में संपर्क करें ! उन्हें किसी भी माध्यम की जरुरत नहीं है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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