इस संसार में जिसका भी जन्म होता है, उसे शनि की साढ़ेसाती और ढ़ैया के प्रभाव से गुजरना ही पड़ता है अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या शनि केवल कष्ट देते हैं ! ऐसा नहीं है !
शनि कभी –कभी अपने साढ़ेसाती, ढ़ैया या महादशा में राजयोग भी देते हैं ! इसका निर्णय जन्मकुंडली में शनि की स्थिति देख कर लगाया जाता है ! जिसका परीक्षण केवल कुशल ज्योतिषी ही कर सकते हैं !
किन्तु शनि के विरोधी होने पर हमारे जीवन में विरोधी प्रभाव पड़ता है जैसे :-
हमारा शरीर हमेशा थका हुआ या आलस से भरा रहता है !
हमारी नहाने में अरूचि हो जाती है या हमें नहाने का वक्त ही न मिलता है !
नए कपड़े खरीदने की इच्छा नहीं होती है या फिर खरीदने के बाद भी पहनने का मौका नहीं मिलता है !
नए कपड़े व जूते जल्दी-जल्दी फट जाते हैं या चोरी हो जाते हैं !
घर में अनावश्यक आग लगने लगती है या फिर तेल, राई, दालें स्वत: नष्ट होने लगती हैं !
कार्यस्थल या घर को व्यवस्थित करने का मन नहीं करता है !
भोजन की इच्छा बिना किसी कारण के ख़त्म हो जाती है
सिर व पिंडलियों में, कमर में दर्द बना रहता है या चेहरे का रंग काला पड़ने लगता है !
परिवार में विशेष रूप से माता-पिता से अनबन होने लगती है ! कोई अच्छा नहीं लगता है !
पढ़ने-लिखने से, लोगों से मिलने में उत्सुकता ख़त्म हो जाती है या चिड़चिड़ाहट होने लगती है !
तो यह जानिये कि शनि नुकसान कर रहा है ! समस्या के समाधान के लिये किसी अच्छे ज्योतिषी से राय अवश्य लीजिये, समस्या का समाधान भगवन शिव की कृपा से अवश्य मिलेगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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