आपका पाप नहीं आपकी वृत्तियां आपको मरेंगी
मुझसे बहुत लोग पूंछते हैं अगले 5 वर्ष में क्या वास्तव में 650 करोड़ लोग मर जायेंगे !आज मैं इसका स्पष्टीकरण देता हूँ !
शैव गणना के अनुसार इस सतयुग आरंभ के संक्रमण काल में ईश्वर की व्यवस्था पर विश्वास न करने वाले 80% लोगों की मृत्यु इसलिए हो जायेगी क्योंकि उनमें यह समर्थ ही नहीं है कि वह दिव्य युग की ऊर्जा को बर्दाश्त कर सकें !
क्योंकि सतयुग की ऊर्जा में व्यक्ति का पूरा हार्मोनल सिस्टम रिबूट हो जायेगा लेकिन व्यक्ति अपने जन्म जन्मान्तर की वृत्ति के मोह में इस हार्मोनल रिबूट सिस्टम को स्वीकार नहीं कर पायेगा, इसलिये उसकी मृत्यु सतयुग आरम्भ के साथ ही हो जायेगी !
कलयुग ‘रजोगुण’ और ‘तमोगुण’ की प्रधानता का युग है, जहाँ अस्थिरता, भौतिक इच्छाएं, तनाव, क्रोध और भय मनुष्य के वृत्ति का हिस्सा है।
मनुष्य लगातार एक अदृश्य दबाव, प्रतियोगिता और असुरक्षा में जी रहा है। जिस कारण उसका शरीर हमेशा “फाइट-और-फ्लाइट” मोड में रहता है।
परिणामत: एड्रेनालाईन और स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) हमेशा व्यक्ति में उच्च स्तर पर रहता है, जिससे प्राय: अधिकांश व्यक्ति को उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मानसिक अशांति बनी रहती है।
सोशल मीडिया, फास्ट फूड, और भौतिक वस्तुओं का उपभोग मस्तिष्क में बार-बार डोपामाइन के तीव्र लेकिन छोटे स्पाइक्स पैदा करता है। इससे डोपामाइन रिसेप्टर्स सुन्न हो जाते हैं, और व्यक्ति हमेशा एक खालीपन महसूस करता है, जिसे भरने के लिए वह और अधिक व्यसनों की ओर भागता है।
इसलिये संतोष और आंतरिक शांति का हार्मोन सेरोटोनिन कलयुग के मनुष्य में अक्सर कम पाया जाता है, जिसके कारण अवसाद और अकेलेपन की भावना हावी रहती है।
जबकि सतयुग में व्यक्ति में ‘सत्त्व गुण’ बढ़ेगा। उस समय का व्यक्ति ध्यान, तप, सत्य और प्राकृतिक जीवन में रत रहेगा। उसकी आयु लंबी होगी और उसे कोई मानसिक क्लेश नहीं होगा।
सतयुग में व्यक्ति में सेरोटोनिन का स्राव निरंतर और स्थाई रहेगा ! ऑक्सीटोसिन प्रेम, करुणा और जुड़ाव का हार्मोन भी निरंतर प्रवाहित रहता रहेगा !
सतयुग में व्यक्ति गहरे ध्यान की अवस्था में मस्तिष्क में निरंतर गामा वेव्ज उत्पन्न करेगा और एंडोर्फिन प्राकृतिक पेनकिलर और आनंद का हार्मोन भी सत्त बहता रहेगा। उनकी पीनियल ग्रंथि पूरी तरह सक्रिय रहेगी, जो उसे निरंतर आध्यात्मिक अनुभूतियां करवाती रहेगी।
यह सभी स्थिती जिन जिन व्यक्तियों के मूल वृत्ति के विपरीत हैं, वह सभी अपना शाररिक बायलोजिकल ऊर्जा संतुलन नहीं बना पायेंगे और उनकी मृत्यु हो जायेगी !
सरल शब्दों में यूँ समझिये जैसे गन्दी नाली के कीड़े को अचानक विशुद्ध गौमुख के शुद्धतम गंगा जल में छोड़ दिया जाये तो वह तत्काल मर जायेगा !
उसी तरह कलयुग में भोग, विलास, कामना, वासना, लालच और हिंसा में जीने वाले लोग 2032 में सतयुग आरम्भ होने के पहले ही संक्रमण काल में अपनी जन्म जन्मान्तर की गलत वृत्तियों के कारण मर जायेंगे, जिनकी संख्या वर्तमान में पूरे विश्व में लगभग 650 करोड़ है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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