ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ाव
समष्टि चेतना में पहले से ही सब कुछ दर्ज है, जिसे “आकाशीय रिकॉर्ड” कहा जाता है ! अध्यात्म मानता है कि हर स्थूल घटना जो दुनिया में घटने वाली है, वह पहले से ही सूक्ष्म जगत में घट चुकी है।
आध्यात्मिक व्यक्ति अपने अंतर्ज्ञान से इस डेटाबेस को एक्सेस करके भविष्य में होने वाली घटनाओं की जानकारी प्राप्त कर लेता है। यह प्रक्रिया ही अन्तस इंदियों को जाग्रत करना है !
आपको बस सिर्फ अपने को बाह्य इन्दियों पर आश्रय कम कर देना है, आप स्वत: वासनाओं और कामनाओं से मुक्त होकर शुद्ध हो जायेंगे और आपकी अंतस इंद्रियां ब्रह्माण्डीय उर्जाओं के साथ स्वत: सक्रिय हो जाएंगी और भविष्य में होने वाली घटनायें आपको स्वत: पता चलने लगेगी !
अब प्रश्न यह है कि ईश्वर इन घटनाओं को हमसे छिपाता क्यों है ?
क्योंकि हम मानसिक और भावनात्मक रूप से निर्बल हैं, इसलिये ईश्वर इन घटनाओं को हमसे छिपाता है, क्योंकि भविष्य में होने वाली नकारात्मक घटना को जानकार हम वर्तमान के सुख को भूल जाते हैं और दुखी हो जाते हैं !
और ईश्वर हमें दुखी नहीं देखना चाहता है, लेकिन यह हमारे कर्म दण्ड हैं, जो भविष्य में कार्य कारण की व्यवस्था के कारण हमें भोगने ही पड़ते हैं !
इसलिये यदि भविष्य की जानना है तो सबसे पहले रसास्वादन की वृत्ति से मुक्त हो जाओ, ईश्वर आपको सब कुछ बतला देगा !
ब्रह्मास्मि क्रिया योग और संस्कार चिकित्सा की साधनायें इसमें विशेष सहायक हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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