सामान्य से महान बनने का सूत्र

महान बनने के लिये किसी बड़ी डिग्री की जरुरत नहीं है, न ही किसी उच्च कुल या संपन्न परिवार में पैदा होने की जरुरत है ! महान व्यक्ति बस सिर्फ ईश्वर का कार्य करके बनता है, जिसे जीवों का कल्याण हो !

जब व्यक्ति ईश्वरीय कार्य को अहसान के बजाय अपना कर्तव्य मान लेता है, तब उस व्यक्ति का ईश्वर से सीधा संपर्क जुड़ जाता है और व्यक्ति के भीतर एक अभूतपूर्व ईश्वरीय ऊर्जा और विचारों में थकान रहित स्थिरता आ जाती है।

जब व्यक्ति सोचता है कि “मैं समाज पर या इन लोगों पर अहसान कर रहा हूँ,” तो उसका अहंकार सक्रिय रहता है। ऐसे में मस्तिष्क बाहरी मान्यता, प्रशंसा और कृतज्ञता की अनावश्यक अपेक्षा पैदा होती है और जब समाज या लोग उसकी अपेक्षा के अनुरूप प्रशंसा नहीं करते हैं, तो मस्तिष्क में ‘कोर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) बढ़ता है। जिससे व्यक्ति हताश, निराश और अन्त में अवसाद में चला जाता है, उसे क्रोध जल्दी जल्दी आने लगता है, और वह आतंरिक खीज के कारण जल्दी जल्दी थकावट का शिकार हो जाता है।

इसके विपरीत जब व्यक्ति लोक कल्याण का कार्य ‘ईश्वर के प्रति कर्तव्य’ मान कर करता है, तो फिर उसे बाहरी प्रशंसा की आवश्यकता नहीं होती है। यह एक ‘निष्काम कर्मवीर’ बन जाता है।

इस अवस्था में, मस्तिष्क में गहरे संतोष के हार्मोन ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन रिलीज़ होते हैं। व्यक्ति निरंतर ऊर्जावान बना रहता है, उसकी प्रेरणा का स्रोत बाहर की प्रशंसा नहीं है, उसके भीतर ही ईश्वरीय चेतना की ऊर्जा प्रज्वलित होती रहती है ।

यही ईश्वरीय चेतना की ऊर्जा व्यक्ति को सामान्य से महान बना देता है ! इसलिये यदि आप में भी महान बनने की इच्छा है तो ईश्वर के लोक कल्याण के कार्य को बिना किसी अपेक्षा के ईश्वर का कार्य समझ कर कीजिये ! आप स्वत: महान हो जायेंगे ! इसका सबसे बड़ा उदहारण दशरथ मांझी जी हैं !!

यदि आप भी हमारे लोक कल्याण महाभियान में जुड़ना चाहते हैं, तो कमेन्ट में अपना नाम और नम्बर दीजिये, हम स्वत: आपसे संपर्क करेंगे !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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