यह बहुत बड़ा भ्रम है कि सत्ता दिल्ली या प्रदेश के सदनों से चलती है, बल्कि बहुत ही नंगा सच यह है कि सत्ता तांत्रिकों के आश्रम या तंत्र की गुप्त गुफाओं से चलती है !
कहने को तो भारत में संवैधानिक लोकतंत्र है, जहाँ नीतियां और कानून सदनों में ही बनते हैं। लेकिन यह “नंगा सच” भी अपनी जगह पूरी तरह कायम है कि चुनाव जीतने, अपनी कुर्सी बचाने और राजनीतिक विरोधियों को पछाड़ने के लिए राजनेताओं ने अक्सर पर्दे के पीछे तंत्र-मंत्र और अनुष्ठानों का भारी सहारा लिया है।
आजादी के बाद से अब तक भारतीय राजनीति में सत्ता और तंत्र के गठजोड़ के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं जैसे
1990 के दशक में, विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान, चंद्रास्वामी का प्रभाव अपने चरम पर था। उनकी एक तांत्रिक के रूप में सीधी पहुँच प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक थी, और कई बड़े राजनेता व मंत्री उनके दरबार में हाजिरी लगाते थे।
इससे पूर्व 1977 में चुनाव हारने के बाद सत्ता में वापसी के लिए इंदिरा गांधी ने कई आध्यात्मिक गुरुओं, पुजारियों और तांत्रिक अनुष्ठानों का सहारा लिया था। देवरहा बाबा जैसे रहस्यमयी संतों का आशीर्वाद लेने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, लालू प्रसाद यादव से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक, हर विचारधारा के राजनेताओं ने शीश झुकाया और राजनीतिक सफलता की कामना की।
वर्तमान दौर में भी यह सिलसिला थमा नहीं है। चुनाव आते ही मध्य प्रदेश के दतिया या नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर और असम के कामाख्या पीठ में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं द्वारा ‘शत्रु नाशक’ और सत्ता प्राप्ति के गुप्त तांत्रिक हवन करवाए जाते हैं। रातों-रात तांत्रिकों को बुलाकर अनुष्ठान कराना आज भी एक आम राजनीतिक हथकंडा है।
राजनेता तांत्रिकों के पास इसलिए इसलिए जाते हैं क्योंकि राजनीति में चरम असुरक्षा, अनिश्चितता और कड़ा मुक़ाबला होता है। सत्ता खोने का डर राजनेताओं को मनोवैज्ञानिक रूप से कमज़ोर कर देता है, और वह अपनी किस्मत और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इन तांत्रिकों की शरण में रहते हैं, जो गुप्त पूजा-पाठ और रहस्यमयी विद्याओं का सहारा देकर इन्हें जन आदेश के विरुद्ध सत्ता में बनाये रखते हैं।
इसलिये तंत्र और राजनेताओं का यह गठजोड़ सत्ता के लालच और कुर्सी छिन जाने के अज्ञात डर से आगे भी चलता रहेगा। कहने को तो देश का औपचारिक प्रशासन तो संसद और संविधान से ही चलता है, लेकिन उस संसद तक पहुँचने और वहां टिके रहने के लिए हमेशा से कई नेता तांत्रिकों के आश्रमों ओर गुफाओं की खाक छानते रहते हैं। यही भारत की गुप्त संस्कृति है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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