समाज को प्रबुद्ध गुरुओं से आत्म कल्याण हेतु ज्ञान नहीं बौद्धिक मनोरंजन चाहिये, इसके लिये सबसे अधिक दोषी तथाकथित लालची, आडम्बरी धर्म गुरु हैं, जो पहने तो भगवा कपड़े हैं लेकिन धूर्तता, मक्कारी, लोभ, ईर्ष्या, उनके रग रग में बसी है !
यही लोग अपनी दुकान बड़ा करने के लिये न तो स्वयं समाज का सही मार्गदर्शन करते हैं और न ही इनकी आईटी सेल समाज का सही मार्गदर्शन करने वाले विचारकों को ईमानदारी से काम करने दे रही है ! जनता को तत्व ज्ञानी गुरु नहीं लोभी चाटुकार गुरु चाहिये !
यह लोभी चाटुकार गुरु न तो शास्त्र जानते हैं, न ही शास्त्र मर्मज्ञों का सम्मान करते हैं ! जिस धर्म में 48 धूर्त मक्कार, लोभ, चरित्रहीन, स्वयम्भू शंकराचार्य हों और चार पीठ के वास्तविक शंकराचार्य आपस में एक दूसरे को नकली बतला कर मुक़दमा लड़ रहे हों !
उस धर्म मानने वाले कथा वाचकों के मनगढ़त प्रपंची कथाओं का सत्यापन कहाँ और किससे करेंगे, आज यह सबसे बड़ी समस्या है !
दूसरी बात अल्प ज्ञानी, भ्रमित, विदेशों से ब्राह्मण विरोध के लिये पैसा पाने वाला गिरोह अपने IT संसाधनों के माध्यम से निरंतर सनातन धर्म के सर्वनाश के लिये नित्य नई नई योजनायें बना रहे हैं ! यह उत्पाती धार्मिक गुण्डे धर्म की कपोलकल्पित व्याख्या कर रहे हैं ! अनपढ़ युवा उसी को सत्य मान कर स्वीकार कर रहा है !
‘मनुस्मृति’ के आठवें अध्याय में न्याय व्यवस्था और राजा के कर्तव्यों का वर्णन है। उसी के अध्याय 8, श्लोक 15 में लिखा गया है !
धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ।
तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत् ॥
जो धर्म का नाश करता है, यानी जो अपने कर्तव्यों और न्याय से मुँह मोड़ता है, तो नष्ट किया हुआ धर्म अंततः उसका ही सर्वनाश कर देता है। इसलिए धर्म का हनन (नाश) कभी नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिती में सनातन धर्म की सही व्याख्या के लिये प्रमाणित संस्थान के स्थापना की बहुत बड़ी आवश्यकता है ! हिन्दू धर्म का कभी सर्वनाश नहीं होगा, यह एक भ्रम है ! आज जीवनशैली से हम हिन्दुत्व छोड़ चुके हैं ! बस आडम्बर और उत्पात के हिन्दू रह गये हैं ! यही हिंदुत्व के सर्वनाश का कारण है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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मोबाईल : 9453092553
