भक्ति अब व्यर्थ का विषय है

विश्व के बदलते बौद्धिक परिवर्तन के अनुसार अब भक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है, इस सत्य को विश्व में लगभग सभी धर्मों ने तार्किक दृष्टि से स्वीकार कर लिया है, इसीलिये अब योरोप जहाँ से ईसाइयत पुर दुनियां में फैली वहां अब चर्च तोड़ी जा रही हैं, सऊदी अरब जहां इस्लाम पैदा हुआ वहां की मस्जिद पर्यटन स्थल में बदली जा रही हैं ! विश्व के 70 से अधिक विकसित देशों में नागरिकों ने धर्म स्थलों पर जाना बंद कर दिया है !

अब हिंदुस्तान के प्रतिष्ठित मंदिर और तीर्थ भी व्यवसायिक केंद्र बन गये हैं ! जहां भक्त और पुजारी दोनों बेईमान हैं !

इसीलिये अब भारत में प्रबुद्ध भक्त मंदिरों में जाकर ढोलक मजीरा पीटने की जगह एकांत में गहन साधना करना ज्यादा पसंद कर रहा है ! भले ही इसके लिये उसे विदेशों के शान्त और एकांत जंगलों में जाना पड़े !

यह सभी कुछ इस बात की सूचना है कि अब भक्ति आंदोलन का प्रभाव निरंतर कम हो रहा है, आने वाला समय युगांतर परिवर्तनीय समय होगा ! जिसमें व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से सीधे कर्म योग द्वारा ईश्वर से जुड़ेगा मतलब अब ढोलक मंजीरा पीट कर धर्म का धंधा करने का समय खत्म हो गया है !

वैसे भी धर्म के 10 प्रमुख लक्षणों में हमारे पूर्वजों ने भक्ति कभी भी महत्व नहीं दिया था !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

शैव ज्ञान के लिये संस्थान की कक्षा से जुड़िये

मोबाईल : 9453092553

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