मानव मस्तिष्क इस तरह से विकसित हुआ है कि जब भी कोई नई जानकारी, नया रहस्य या अनिश्चितता सामने आती है, तो हमारे भीतर डोपामीन नामक हार्मोन का स्राव होता है। यह हार्मोन हमें संतुष्टि ही नहीं देता, बल्कि और अधिक जानने या प्राप्त करने की ‘तड़प’ भी पैदा करता है।
जब बाज़ार या सोशल मीडिया जानबूझकर कोई आधी-अधूरी जानकारी आपके सामने रखता है, तो यह आपके मस्तिष्क में एक ‘सूचना का अंतराल’ पैदा करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से, इस जानकारी को न पा सकना हमें एक ‘क्षति’ की तरह महसूस होती है।
इस मानसिक बेचैनी और अधूरापन को दूर करने के लिए, हमारी जो इच्छा पैदा होती है वही नये नये बंधनों का निर्माण करती है ! मार्केटिंग की दुनिया में इसे ‘क्यूरियोसिटी गैप’ कहते हैं।
इसीलिये मजे हुये विज्ञापनदाता और ब्रांड आपको कभी भी पूरी बात एक बार में नहीं बताते। वह आकर्षक थंबनेल, लुभावने शीर्षक या टीज़र के माध्यम से आपकी उत्सुकता को एक ‘हुक’ की तरह इस्तेमाल करते हैं।
आप जिस विषय को लेकर जितने अधिक उत्सुक होते हैं, बाज़ार आपके सामने उसी विषय से जुड़े उतने ही अधिक लुभावने अवसर पेश करता है। वह आपको यह यकीन दिला देते हैं कि उस विशेष वस्तु या सेवा के बिना आपका जीवन या आपका ज्ञान, सम्मान सब कुछ अधूरा है। इस तरह, आपकी उत्सुकता का दोहन करके आपको वह बेचा जाता है, जिसकी शायद आपको कोई आवश्यकता ही नहीं थी।
इसलिये शैवों के जीने का तरीका एकदम अलग होता है, तभी तो वह किसी उत्सुकता के बंधन में नहीं फंसते हैं ! यही उनके सफल और संतुष्ट जीवन का रहस्य है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
शैव ज्ञान के लिये संस्थान की कक्षा से जुड़िये
मोबाईल : 9453092553

