भारतीय संस्कृति में जल को केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। प्राचीन काल से ही पूजा-पाठ में ‘आचमन’ और ‘अभिमंत्रित जल’ (मंत्रों से सिद्ध किया हुआ पानी) का उपयोग होता आया है। आधुनिक युग में जल शुद्धि के लिए हम आरओ (Reverse Osmosis – RO) तकनीक पर निर्भर हो गए हैं। लेकिन क्या यह तकनीकी रूप से शुद्ध पानी वास्तव में हमारे शरीर के लिए सर्वोत्तम है? कई शोधकर्ताओं और विचारकों का मानना है कि आरओ का पानी ‘मृत जल’ (Dead Water) है, जबकि अभिमंत्रित जल जीवंत और कहीं अधिक शक्तिशाली होता है।
आरओ मशीनें पानी से अशुद्धियों और भारी धातुओं को निकालने में बहुत सक्षम हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में वे एक बड़ी गलती करती हैं ! आरओ की झिल्ली इतनी महीन होती है कि वह पानी से शरीर के लिए आवश्यक कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे प्राकृतिक खनिजों को भी बाहर कर देती है।
खनिजों के निकल जाने से आरओ के पानी का pH स्तर गिर जाता है, जिससे वह हल्का अम्लीय हो जाता है। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
जल के अभिमंत्रित होने और उसकी शक्ति बढ़ने के पीछे सबसे अधिक उद्धृत किया जाने वाला सिद्धांत जापानी वैज्ञानिक डॉ. मसारू इमोटो (Dr. Masaru Emoto) का है।
डॉ. इमोटो ने पानी पर मानवीय विचारों, शब्दों और मंत्रों के प्रभाव का अध्ययन किया। उन्होंने पानी के अलग-अलग नमूनों पर सकारात्मक शब्द जैसे ‘धन्यवाद’, ‘प्रेम’, और मंत्र और नकारात्मक शब्द बोले। इसके बाद जब उस पानी को जमाकर माइक्रोस्कोप से उसके क्रिस्टल बर्फ के कणों की तस्वीरें ली गईं, तो नतीजे हैरान करने वाले थे।
जिन पानी के नमूनों को मंत्रों या सकारात्मक शब्दों से अभिमंत्रित किया गया था, उनके क्रिस्टल बेहद सुंदर, सममित और ज्यामितीय आकार के बने और नकारात्मक शब्दों वाले पानी के क्रिस्टल विकृत और बदसूरत थे।
क्योंकि जल के प्रत्येक कण में एक ‘स्मृति’ होती है। जब हम पानी को अभिमंत्रित करते हैं, तो मंत्रों की ध्वनि तरंगें पानी की आणविक संरचना को एक सामंजस्यपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप में बदल देती हैं।
यह सुव्यवस्थित पानी जब शरीर में प्रवेश करता है, तो कोशिकाओं द्वारा अधिक आसानी से अवशोषित होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
इसलिये आरओ का पानी शुद्ध है लेकिन आवश्यक तत्वों से रहित है। अभिमंत्रित जल मन और आत्मा को शक्ति देता है। सर्वोत्तम स्वास्थ्य के लिए हमें प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संतुलन बनाना आवश्यक है !
इसके लिये यदि पानी शुद्ध नहीं है या छत पर गर्म प्लास्टिक की टंकी में भरा रहता है, तो आरो का पानी निकाल कर मिट्टी के मटके में भर लीजिये और उसे अपने ईश्वर को साक्षी मान कर मानसिक शक्तियों से अभिमंत्रित कीजिये, धन्यवाद दीजिये ! इसके बाद ही उसका सेवन कीजिये ! आपको चमत्कारिक लाभ मिलेगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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