ज्योतिष शास्त्र में स्वतंत्रता के बाधित होने, कानूनी विवादों, या किसी भी प्रकार के एकांतवास (चाहे वह वास्तविक कारावास हो या मानसिक रूप से बंधा हुआ महसूस करना) को ‘बंधन योग’ या ‘कारावास योग’ कहा जाता है।
कुंडली में मुख्य रूप से छठा भाव (मुकदमेबाजी, शत्रु), आठवां भाव (दंड, संकट), और बारहवां भाव (बंधन, जेल, एकांत) इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। ग्रहों में शनि, मंगल, राहु और केतु को बंधन का मुख्य कारक माना गया है।
इसके अलावा द्वितीय और द्वादश भाव में समान संख्या में अशुभ ग्रह हों या तृतीय और एकादश भाव में बराबर ग्रह हों। या फिर चतुर्थ और दशम भाव में, या पंचम और नवम भाव में समान पाप ग्रह स्थित हों।
तो प्रबल कारावास योग बनता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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