सुकून हमेशा ही सस्ता होता है, लेकिन हमारे दिखावे की आदत उसे महंगा बना देती है ! अर्थात मानसिक शांति को किसी तामझाम की जरूरत नहीं होती है। वह बहुत छोटी और सहज चीजों में मिल जाती है ! जैसे अपनों के साथ दो पल शांति से बैठना, प्रकृति को निहारना, एक गहरी और बेफिक्र नींद लेना। आदि आदि
इसके लिए कोई बड़ी कीमत नहीं चुकानी पड़ती है। लेकिन इंसान के ‘दिखावे की आदत’ जिसके पीछे समाज में खुद को बड़ा साबित करने की मानसिकता है, वह इस सुकून को बेहद महंगा बना देती है।
हम दूसरों को प्रभावित करने के चक्कर में अपनी असलियत और अपनी सहजता दोनों खो देते हैं। घर को सजाने में रात-दिन एक कर देते हैं, जिसमें बैठकर चैन से हंसने का वक्त ही नहीं बचता।
उन महंगी चीजों को खरीदने के लिए कर्ज और तनाव का बोझ उठा लेते हैं, जिनकी असल में हमें कोई जरूरत ही नहीं थी।
जो आपको सहज प्रेम करता है, वह आपको प्रेम करता है, आपके मकान या वैभव पूर्ण आडम्बर को प्रेम नहीं करता है ! और जो आपके आडम्बर को प्रेम करता है वह स्वार्थी, धूर्त और मक्कार है, उसके लिये अपने जीवन को नर्क क्यों बनाना !
यह रहस्य जिस दिन आप गहराई से समझ जायेंगे, उसी दिन आप जीवन के व्यर्थ की भाग दौड़ से मुक्त हो जायेंगे !
यही जीव की स्वाभाविक अवस्था है, इसी अवस्था से प्राप्त सुकून के लिये व्यक्ति को कोई कीमत नहीं देनी पड़ती है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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