जैसे-जैसे विज्ञान और ब्रह्मांड को लेकर मनुष्य की समझ गहरी हो रही है, समाज में यह बहस तेज हो गई है कि हमें प्राचीन मान्यताओं को किस रूप में देखना चाहिए।
मानव जाति के सामने आज जलवायु परिवर्तन, बीमारियां और तकनीकी चुनौतियां हैं, जिनका समाधान केवल विज्ञान, तर्क और साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। इन वास्तविक समस्याओं को सुलझाने के लिए अंधभक्ति या मिथकों से बाहर आना जरूरी है।
जब धर्म ग्रंथों की कहानियों को शाब्दिक या अंतिम सत्य मान लिया जाता है, तो यह अक्सर कट्टरपंथ, सामाजिक भेदभाव और अंधविश्वास को जन्म देता है। इस ‘कपोल कल्पित’ या शाब्दिक दुनिया को छोड़ना एक प्रगतिशील और समानता आधारित समाज के लिए आवश्यक है।
भले ही हम धर्म ग्रंथों को विज्ञान या इतिहास की सटीक किताब न मानें, लेकिन उन्हें पूरी तरह से खारिज करना भी मुश्किल है। यह ग्रंथ मानव मनोविज्ञान, प्राचीन समाज के काम करने के तरीके, साहित्य और नैतिकता के विकास का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज हैं।
भविष्य का समाज शायद धर्म ग्रंथों को ब्रह्मांड की ‘फैक्ट बुक’ के रूप में नहीं, बल्कि रूपकों और जीवन के दार्शनिक सबक के रूप में देखेगा। जैसे हम ग्रीक या रोमन माइथोलॉजी को आज साहित्य और कला के नजरिए से पढ़ते हैं।
उसी तरह मनुष्य को धर्म ग्रंथों को ‘छोड़ने’ से ज्यादा उन्हें ‘देखने का नजरिया’ बदलने की जरूरत है, उन्हें अकाट्य सत्य मानने के बजाय, मानव इतिहास की एक साहित्यिक और दार्शनिक इतिहास के रूप में देखा जाना चाहिये !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
गुरुदेव योगेश कुमार मिश्र की फोटो और नाम के साथ 1280 × 1000 पिक्सेल में कम से कम शब्दों में एक चित्र बनाइये जिसमें गुरुदेव सफ़ेद कुर्ता पैजामा में अपने शैव ग्राम के अध्ययन कक्ष में लेखन कर रहे हैं पूरा कमरा धर्म ग्रंथों से भरा है ! ऊपर से स्पेस देते हुये बड़े शब्दों में हेडिंग रहेगी ‘धर्म ग्रंथों की कपोल कल्पित दुनिया से निकलना होगा’ फोटो में गुरुदेव का एक ही चित्र प्रयोग कीजिये नाम के साथ कोई फोटो मत लगिए संपर्क 9453092553

