सामाजिक माध्यम की गणितीय प्रणाली (कलन विधि) पूर्णतः मानवीय भावनाओं के दोहन पर आधारित है। संतों और राजनेताओं को अपशब्द कहने के पीछे छिपे इस पूरे सोशल मीडिया तंत्र के मनोविज्ञान और तकनीकी प्रणाली के अंकगणित के माध्यम से समझिये !
एल्गोरिदम का गणित
सामाजिक मंचों की प्रणाली किसी भी विचार या चित्र को उसके गुण-दोष के आधार पर नहीं, बल्कि उस पर मिलने वाली त्वरित प्रतिक्रियाओं के आधार पर तौलती है। प्रणाली का एक अदृश्य मूल्यांकन मापदंड होता है, जो इस प्रकार काम करता है:
केवल देखने पर: 1 अंक
पसंद (लाइक) करने पर: 2 अंक
साझा (शेयर) करने पर: 5 अंक
टिप्पणी (कमेंट) करने पर: 10 अंक
सकारात्मक, रचनात्मक या ज्ञानवर्धक कार्यों को देखकर लोग प्रायः मन ही मन प्रसन्न होते हैं। वह अधिकतम ‘पसंद’ का बटन दबाकर आगे बढ़ जाते हैं। इससे सामग्री को बहुत कम अंक मिलते हैं और प्रणाली उसका प्रसार रोक देती है।
इसके विपरीत, जब किसी संत या राजनेता का अपमान होता है, तो भावनाओं में उबाल आता है। लोग विरोध दर्ज कराने या बहस करने के लिए लंबी टिप्पणियां करते हैं। प्रति टिप्पणी जुड़ने वाले 10 अंक उस सामग्री को प्रणाली की नजर में अत्यधिक ‘प्रासंगिक’ बना देते हैं।
यही मानव मस्तिष्क शांतिपूर्ण और अच्छी बातों की तुलना में खतरे, क्रोध या विवाद पैदा करने वाली बातों पर अधिक तीव्रता से प्रतिक्रिया देता है।
यदि कोई व्यक्ति प्राकृतिक जीवन या किसी अच्छे कार्य का विवरण लिखता है, तो उसे 100 लोग देखेंगे और संभवतः 5 टिप्पणियां आएंगी। प्रसार वहीं थम जाएगा।
वहीं, यदि कोई व्यक्ति किसी प्रतिष्ठित राजनीतिक दल या महापुरुष को अपशब्द कहता है, तो आहत होकर समर्थक 500 टिप्पणियां करेंगे और विरोधी समर्थन में 500 टिप्पणियां करेंगे। प्रणाली के गणित में यह 1000 टिप्पणियां एक प्रचंड ऊर्जा का काम करती हैं, और प्रणाली स्वतः उस सामग्री को 100000 नए लोगों के पटल पर धकेल देती है।
विवाद उत्पन्न करके अपनी पहुँच बढ़ाने वाले लोग इसी गणित का सीधा लाभ उठाते हैं। वह जानते हैं कि किसी सामान्य विषय पर अपशब्द कहने से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी। संतों, महापुरुषों या शीर्ष राजनेताओं के लाखों-करोड़ों अनुयायी होते हैं। उन पर प्रहार करने का सीधा अर्थ है एक बड़े समूह की भावनाओं को कुरेदना।
जैसे ही अनुयायी उस व्यक्ति को पाठ पढ़ाने या अपना आक्रोश जताने के लिए टिप्पणी खंड में उतरते हैं, वह अनजाने में उसी व्यक्ति का उद्देश्य पूरा कर रहे होते हैं। विरोध में लिखी गई हर एक टिप्पणी उस अपशब्द को और अधिक लोगों तक पहुँचाने का ईंधन बन जाती है।
इस तरह की नकारात्मक क्रिया समाज के संरचनात्मक दोष के कारण उत्पन्न होती है ! यदि समाज सकारात्मक विचारों पर अधिक टिप्पड़ी करे तो एल्गोरिदम का गणित सकरात्मक विचारों को प्रात्साहित करेगा ! लेकिन समाज में ऐसा नहीं होता है !
यह समाज की सामूहिक चेतना का एक बड़ा दोष है कि हम श्रेष्ठता और रचनात्मकता का मौन रहकर सम्मान करते हैं, लेकिन उच्छृंखलता पर मुखर होकर ऊर्जा व्यय करते हैं। सामाजिक मंच इसी मौन और मुखरता के अंतर का व्यापार करते हैं। एक बार जब कोई व्यक्ति इस नकारात्मक मार्ग से लाखों लोगों तक पहुँच बना लेता है, तो वह उसी ध्यान (अटेंशन) को धन और प्रसिद्धि में परिवर्तित कर लेता है।
जब तक समाज अच्छे और रचनात्मक कार्यों की भरपूर सराहना टिप्पणी और व्यापक चर्चा के माध्यम से नहीं करेगा, तब तक यह गणितीय प्रणाली विवाद और अपशब्दों को ही सफलता और पहुँच का एकमात्र सूत्र मानती रहेगी। यह ध्यान को दूषित करने का एक अत्यंत सुविचारित अर्थशास्त्र है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553

