आज हम जिस पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को बच्चों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी मानते हैं, वह अगले कुछ ही वर्षों में अप्रासंगिक हो जाएगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्रांति के इस दौर में, स्कूलों और कॉलेजों की महंगी फीस पर लाखों रुपये खर्च करना माता पिता के लिये एक बड़ी आर्थिक भूल सिद्ध होगी।
आने वाले समय में, बस सिर्फ अक्षर ज्ञान का महत्त्व रह जायेगा ! बेहतरीन शिक्षा इंटरनेट और ट्यूटर्स के माध्यम से लगभग मुफ्त या बेहद कम लागत पर घर बैठे उपलब्ध होगी।
दुनिया की शीर्ष कंपनियां अब चार साल की महंगी डिग्रियों के बजाय युवाओं के व्यावहारिक कौशल, रचनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमता को महत्व दे रही हैं।
जो ज्ञान आज लाखों रुपये देकर खरीदा जा रहा है, वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में रटकर पास होने वाली परीक्षाओं और डिग्रियों का कोई विशेष मोल नहीं बचेगा।
इसलिए, बच्चों की शिक्षा के नाम पर लाखों रुपये की फीस भरना या भारी ‘एजुकेशन लोन’ लेना समझदारी नहीं है। जरा सोचिए, आप जो 20-30 लाख रुपये बच्चे की उस पारंपरिक कॉलेज डिग्री पर खर्च करने वाले हैं, यदि वही पैसा बच्चे के बचपन से ही उसके नाम पर अच्छे इंडेक्स फंड या म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाए, तो बच्चे के पास युवा होते ही कम से कम 50 लाख की नगद पूंजी होगी, यह परिणाम कितने क्रांतिकारी होंगे!
कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) की ताकत से जब आपका बच्चा 21 वर्ष का होगा, तब उसके पास एक बहुत बड़ा वित्तीय आधार होगा। यह आर्थिक स्वतंत्रता उसे अपनी पसंद के आधुनिक कौशल सीखने, अपना व्यवसाय शुरू करने या बिना किसी नौकरी के दबाव के अपने जुनून को पूरा करने की आजादी देगी।
आज के बच्चों को एजुकेशन लोन की ईएमआई चुकाने की दौड़ में धकेलने के बजाय, उन्हें ‘वित्तीय स्वतंत्रता’ दें। पुरानी शिक्षा पर अंधाधुंध पैसा बर्बाद करने के बजाय, उनके भविष्य के लिए आज से ही निवेश करें। उन्हें कागजी डिग्रियां नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत दें।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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