मेरा यह मत है कि भविष्य की पीढ़ियां ‘धर्म’ शब्द के उस कर्मकांडीय और अवैज्ञानिक पारलौकिक सुख के महत्व को पूरी तरह त्याग देंगी, जिसे आज हम अपनाये हुये हैं।
इसके बजाय, धर्म अपने मूल स्वाभाविक अर्थ लोक कल्याण, महाकल्याण की ओर लौटेंगे।
भविष्य का धर्म किसी अदृश्य सत्ता को प्रसन्न करने की जगह, दृश्यमान ब्रह्मांड, प्रकृति और मानव चेतना को समझने और संवारने में अधिक विश्वास रखेगा ।
भविष्य के इस नए ‘धर्म’ या जीवन-दर्शन के मुख्य स्तंभ में सबसे बड़ा पुण्य या धार्मिक कृत्य प्रकृति का संरक्षण होगा। कंक्रीट के मंदिरों के बजाय, घने खाद्य वनों का निर्माण, पक्षियों और वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास पुनर्जीवित करना और बंजर भूमि को हरा-भरा बनाना सर्वोच्च आध्यात्मिक कार्य माना जाएगा।
शून्य-बजट प्राकृतिक जीवनशैली और प्रकृति-केंद्रित अर्थशास्त्र को अपनाना मनुष्य का पहला कर्तव्य होगा।
भविष्य का धर्म आध्यात्मिकता के अंधविश्वासों का नहीं होगा, बल्कि न्यूरोसाइंस और मनोविज्ञान पर आधारित होगा। मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों का संतुलित विकास, चेतना के उद्गम को समझना और संज्ञानात्मक असंगति जैसी मानसिक उलझनों से मुक्त होना ही सच्ची ‘तपस्या’ कहलाएगी। लोग खुद को जानने के लिए कथा-कहानियों का नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और मस्तिष्क विज्ञान का सहारा लेंगे।
आने वाली पीढ़ियां मरे मराये लोगों के पत्थर की मूर्तियों के सामने प्रार्थना के लिये हाथ जोड़कर मांगना नहीं करेंगे, बल्कि चुनौतियों को अवसरों में बदलने की कला सीखेंगे।
युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा, व्यावहारिक कौशल-निर्माण और आत्मनिर्भरता ही जीवन का नया ‘पुरुषार्थ’ होगा। यह दर्शन सिखाएगा कि आपदाओं से उदित होना और अपने कर्मों से समाज को दिशा देना ही वास्तविक शक्ति है।
भविष्य का युवा ‘राज ऋषियों’ जैसी नेतृत्व क्षमता स्वयं में विकसित करेगा ! भविष्य का समाज ऐसे नेतृत्व को आदर्श मानेगा जो सत्ता और ज्ञान का संतुलित रूप हो !
एक ऐसा व्यक्ति जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता हो, जो प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधक हो और जिसके भीतर गहरा दार्शनिक ठहराव हो। नेतृत्व का यह ढांचा आदेश देने के बजाय, समाज को स्थिरता और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने की प्रेरणा देगा।
भविष्य का धर्म कोई बंद किताब का ज्ञान नहीं होगा, बल्कि एक निरंतर विकसित होने वाला ‘ओपन-सोर्स’ प्राकृतिक ज्ञान होगा, जिसमें विज्ञान के नये प्रयोग और मनोवैज्ञानिक मानवीय अनुभव लगातार जुड़ते जाएंगे। इसीलिये भविष्य में युवाओं का सबसे लोकप्रिय तीर्थ शैव ग्राम होगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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