किसी भी सामान्य व्यक्ति को वैश्विक ख्याति प्राप्त सन्त बनने के लिये 6 चरण में कार्य करना पड़ता है !
पहला चरण मूल विचार और विशिष्ट छवि का निर्माण: सामान्य व्यक्ति आध्यात्मिक की पहचान केवल कर्मकांड तक सीमित न रखकर, उन्हें मानव चेतना, प्राकृतिक जीवन और भविष्य के धर्म के एक व्यावहारिक विचारक के रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है। उनका संदेश ऐसा होना चाहिए जो आधुनिक समाज की समस्याओं का सीधा भक्ति, भजन, हरि नाम संकीर्तन से समाधान दे।
दूसरा चरण साहित्य का व्यापक वितरण: विचारों को अत्यंत सरल भाषा में लिखित पुस्तकों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना विपणन का एक मुख्य साधन है। युवा वर्ग के बीच बड़े पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित करना और वृक्षारोपण जैसे सामाजिक अभियानों के साथ हजारों पुस्तकों का निःशुल्क वितरण करना, उनके संदेश की पहुँच को अत्यधिक विस्तृत कर देता है। ऐसी किताब लिखने वाले इस बेरोजगारी के दौर में जगह जगह हर शहर में मिल जाते हैं !
तीसरा चरण जीवंत और प्रायोगिक केंद्रों की स्थापना: वैश्विक ध्यान आकर्षित करने के लिए एक ऐसे भौतिक केंद्र की आवश्यकता होती है, जहाँ उस व्यक्ति के प्रत्यक्ष दर्शन हो सकें । मिट्टी, चूने और बाँस से बने पर्यावरण-अनुकूल भवन, सघन वन और शून्य लागत वाली प्राकृतिक जीवनशैली वाले केंद्र विश्व भर के जिज्ञासुओं को बहुत आकर्षित करते हैं।
चौथा चरण अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक तंत्र से जुड़ाव: वैश्विक पहुँच के लिए विश्वव्यापी स्वयंसेवक संस्थाओं के साथ जुड़ना एक अत्यंत प्रभावी रणनीति है। जब विभिन्न देशों के नागरिक इन प्राकृतिक केंद्रों में आकर कार्य करते हैं और ध्यान सीखते हैं, तो वे अपने देशों में लौटकर स्वतः ही उस दर्शन के वैश्विक संदेशवाहक बन जाते हैं।
पांचवां चरण युवा नेतृत्व और आवासीय प्रशिक्षण: किसी भी विचार को चिरस्थायी बनाने के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करना सबसे बड़ा निवेश है। भाग्य परिवर्तन, आत्म-निर्माण और जीवन प्रबंधन जैसे विषयों पर 10 दिवसीय गहन आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने से एक ऐसा निष्ठावान समूह तैयार होता है, जो सामान्य व्यक्ति के विचारों को एक व्यवस्थित आंदोलन के रूप में पूरे विश्व में फैलाते हैं। जिससे उनकी सन्त छवि का नि:शुल्क प्रचार होता है !
छठा चरण सुदृढ़ प्रशासनिक और विशेषज्ञ दल: एक वैश्विक अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए केवल भावनाओं की नहीं, बल्कि प्रबंधन की भी आवश्यकता होती है। एक व्यवस्थित संस्था का निर्माण और उसमें सूचना तकनीक, निर्माण, कानून और वित्त क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक मुख्य टीम को शामिल करना, इस पूरे अभियान को संस्थागत स्वरूप और विश्वसनीयता प्रदान करता है।
इस प्रकार, विचार, साहित्य, भौतिक अनुभव और युवाओं के माध्यम से एक सुनियोजित विपणन श्रृंखला तैयार होती है जो एक सामान्य व्यक्ति को विश्वव्यापी सन्त बना देता है और एक बार सिस्टम खड़ा कर देने के बाद यह स्व संचालित सिस्टम लम्बे समय तक बिना किसी प्रयास के चलता रहता है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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