भारत में टेक्नोलॉजिस्ट को भी वैज्ञानिक समझते हैं

मानव सभ्यता के विकास के इतिहास पर यदि दृष्टि डालें, तो दो प्रकार की जिज्ञासाओं ने इस यात्रा को गति दी है, पहला, यह जानना कि यह सृष्टि कैसे काम करती है; और दूसरा, इन रहस्यों का उपयोग करके अपने जीवन को सुगम कैसे बनाया जाए।

इन दो बुनियादी प्रवृत्तियों के दो अलग-अलग संवाहक हैं, एक वैज्ञानिक और दूसरा टेक्नोलॉजिस्ट।

यद्यपि दोनों विज्ञान और तकनीक की विशाल छत्रछाया में एक-साथ काम करते हैं, किंतु उनके मार्ग, उद्देश्य और गंतव्य भिन्न हैं।

जैसे एक वैज्ञानिक का मूल सरोकार “सत्य की खोज” से होता है। वह प्रकृति के अंतःकरण में झांककर यह समझने का प्रयास करता है कि ब्रह्मांड की मूल प्रणालियां किस नियम के तहत संचालित हो रही हैं। उसके लिए गुरुत्वाकर्षण का नियम, क्वांटम यांत्रिकी या प्रकाश की गति केवल आंकड़े नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय सत्य हैं।

वैज्ञानिक का प्रश्न हमेशा “क्यों?” और “कैसे?” से शुरू होता है। वह अपनी प्रयोगशालाओं में प्रयोगों के माध्यम से अज्ञात को ज्ञात में बदलने का अथक प्रयास करता है। उसकी उपलब्धि किसी नए सिद्धांत, नियम या प्राकृतिक परिघटना के उद्घाटन में निहित होती है।

इसके विपरीत, टेक्नोलॉजिस्ट का ध्यान “व्यावहारिकता और निर्माण” पर केंद्रित होता है। वह वैज्ञानिक द्वारा खोजे गए सिद्धांतों को आधार बनाता है और उनसे मानव समस्याओं के ठोस समाधान तैयार करता है।

टेक्नोलॉजिस्ट का प्रश्न “इसे कैसे बनाया जाए?” या “इससे जीवन को बेहतर कैसे बनाया जाए?” होता है। जहां वैज्ञानिक एक नया भौतिक सिद्धांत प्रतिपादित करता है, वहीं टेक्नोलॉजिस्ट उस सिद्धांत का उपयोग करके अंतरिक्ष यान, चिकित्सा उपकरण, या हाई-स्पीड संचार नेटवर्क जैसी मूर्त प्रणालियों का सृजन करता है। लेकिन लोग दुर्भाग्य से इन्हें भी वैज्ञानिक समझ लेते हैं !

इसे एक क्लासिक उदाहरण से भली-भांति समझा जा सकता है। बीसवीं शताब्दी के आरंभ में महान भौतिकीविद् अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी मेधा के बल पर ‘सापेक्षता का सिद्धांत’ प्रतिपादित किया। यह विशुद्ध रूप से एक वैज्ञानिक का कार्य था, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष और समय के संबंध को समझना था।

परंतु, आज जब आप अपने स्मार्टफोन में जीपीएस मैप खोलकर अनजान रास्तों पर सफर करते हैं, तो वह प्रणाली उसी सिद्धांत के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर टिकी है। जीपीएस उपग्रहों को सटीक समय संरेखण के लिए सापेक्षता के सिद्धांतों की आवश्यकता होती है। उस सिद्धांत को एक उपयोगी तकनीक में ढालने का काम टेक्नोलॉजिस्ट ने किया।

संक्षेप में कहें तो, वैज्ञानिक दुनिया को ‘समझने’ का माध्यम है, और टेक्नोलॉजिस्ट उस समझ के आधार पर दुनिया को ‘गढ़ने’ का यंत्र है।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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