
तृतीय विश्व युद्ध से प्रकृति को सुख : Yogesh Mishra
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥38॥ जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुःख…

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥38॥ जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुःख…

पूरे विश्व में इलुमिनिती के इशारे पर गुंडई करके वाले अमेरिका ने बिना किसी कारण ड्रोन…

सिद्धि सामान्यतः किसी भी मनचाहे मनोरथ को पूरा करने की क्षमता को व्यक्त करती है !…

महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर हुई थी ! इस हत्या…

आज हम बड़े गर्व से कहते हैं कि भारत इतना सहिष्णु और उदार देश है कि…

हिमालय में आज भी हजारों ऐसे स्थान हैं ! जहाँ पूर्व में कभी देवी-देवताओं और तपस्वी…

मैने पूर्व के एक लेख में लिख दिया था कि रावण ने अपने जीवन काल में…

हिंदुस्तान में राम के कई रूप हैं ! कई भाव हैं ! किसी के लिये राम…

शास्त्रीय घटनायें यह बतलाती हैं कि जब भी कभी एक माह में तीन बार ग्रहण एक…