
आलोचना और समालोचना में अन्तर
प्राय: आलोचना और समालोचना का अन्तर नहीं जानते हैं ! और लोग अक्सर ऐसा कहा करते…

प्राय: आलोचना और समालोचना का अन्तर नहीं जानते हैं ! और लोग अक्सर ऐसा कहा करते…

सोलहवीं सदी तक एशिया और यूरोप में चेचक, खसरा या प्लेग (काली मौत) जैसी बीमारियाँ आम…

इसमें कोई शक नहीं कि प्रकृति ने मनुष्य को प्रगट ही नहीं किया बल्कि उसे पोषित…

हिंदू सदैव से राजसत्ता का चाटुकार और धर्म के प्रति दोगला रहा है ! यही वजह…

हमारे बहुत से साथी आज भारत को पुनः विश्वगुरु बनाना चाहते हैं, लेकिन अपने अपने तरीके…

विचार करो आप शांति के लिये किसकी पूजा कर रहे हो ! जिन्हें वैष्णव भगवान कहकर…

अवधूत ऐसा इंसान होता है, जो मन के भाग दौड़ को त्याग कर शिशु जैसी अवस्था…

पुरी पीठ के शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती जी ने अभी हाल में अपना मत दिया है…

व्यक्ति सुख, संतुष्टि और आनंद के लिए पूरे जीवन इधर-उधर भटकता रहता है ! कोई धन…