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कभी इस पृथ्वी पर बस सिर्फ शैवों का शासन था : Yogesh Mishra

 जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि आज से 10,000 साल पहले भारत पर वैष्णव आक्रांताओं ने छल पूर्वक अपना नियंत्रण करना शुरू कर दिया था ! जिसे भारत के इतिहास में आर्यों का आगमन कहा गया ! जिससे…

अनियंत्रित इंद्रियां ही अपराध का कारण हैं : Yogesh Mishra

वैष्णव मत दर्शन के अनुसार मनुष्य को 14 इंद्रियां प्राप्त हैं ! पांच ज्ञानेंद्रियां आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा; पांच कर्मेंद्रियां हाथ, पैर, मुंह, गुदा और लिंग और चार अंतःकरण मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ! मन, बुद्धि, चित्त…

वैश्विक आर्थिक मंदी भारतीयों के लिए एक सुनहरा अवसर : Yogesh Mishra

जैसा कि विश्व के सभी अर्थशास्त्री घोषणा कर रहे हैं कि दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 तक पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाएगी ! इस तरह की घोषणा अपने आप में यह सिद्ध करती है कि आर्थिक…

आपका संस्कार ही आपका भगवान है : Yogesh Mishra

 वैष्णव जीवन शैली में एक अवधारणा यह भी है कि “होई है वही जो राम रचि राखा” अर्थात इस दुनिया में आपके साथ जो कुछ भी होना है, उसे ईश्वर ने पहले से ही लिख रखा है या दूसरे शब्दों…

हिन्दू धर्म के आधारहीन व्याख्याकार : Yogesh Mishra

आज हिंदू समाज में सबसे बड़ी दिक्कत यह हो रही है कि हिंदू धर्म के नये व्याख्याकार परंपरागत हिंदू धर्म के प्रवक्ताओं के लिये आधुनिक विज्ञान का सहारा लेकर चुनौती बनते जा रहे हैं !  और हिंदू धर्म के परंपरागत…

स्वतंत्र विचारकों को आतंकवादी घोषित करने की तैयारी : Yogesh Mishra

 2019 के बाद जिस तरह वैक्सीन का विरोध कुछ डॉक्टर और चिंतकों द्वारा किया गया ! उसको लेकर 7 फरवरी 2022 में अमेरिका की संसद के अंदर एक बिल लाया गया ! जिसमें उपलब्ध तथ्यों का गहराई से अध्ययन करने…

अष्टावक्र गीता का सार : Yogesh Mishra

 “अष्टावक्र गीता” का आरंभ राजा जनक द्वारा पूछे गये तीन प्रश्नों से होता है ! 1. ज्ञान कैसे होता है ? 2.  मुक्ति कैसे होती है ? 3. वैराग्य कैसे होता है ? सभी आध्यात्मिक व्यक्तियों के अनादि काल से…

अवतारवाद का विज्ञान : Yogesh Mishra

 अवतार के विषय में कोई भी चर्चा करने के पहले यह जान लेना बहुत आवश्यक है कि अवतार का वर्णन न तो वेदों में मिलता है और न ही वेदांत में !  इसी तरह अवतार का वर्णन न तो सनातन…

अपने बचत का पैसा कहां सुरक्षित रखें : Yogesh Mishra

 हर व्यक्ति बहुत ही परिश्रम से पैसे कमाता है और बैंक में अकाउंट खोल कर या एफ.डी.आर. आदि के माध्यम से उस कमाये हुए पैसे का एक अंश बचाता है ! लेकिन ज्ञान के अभाव में आज व्यक्ति यह नहीं…

अति धार्मिकता ही हमारे सर्वनाश का कारण है

 यह एक कठोर सत्य है कि जब भी समाज में धर्म और भौतिकता का असंतुलन हुआ है, तब समाज अपने विनाश की ओर बढ़ गया है !  इसे दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि कोई भी…