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समाधि का सूक्ष्म विज्ञान : Yogesh Mishra

मनुष्य में आकर्षण और अभिव्यक्ति के कई तल हैं ! जो मनुष्य के कर्मेंद्रियों और ज्ञानेंद्रियों को नियंत्रित करते हैं ! इन्हीं आकर्षण और अभिव्यक्ति को मनुष्य अज्ञानता में जन्म से मृत्यु तक अज्ञात कामना और वासना की संतुष्टि के…

द्रष्टा संन्यास आज की आवश्यकता है : Yogesh Mishra

शैव जीवन शैली में संन्यास का सीधा सा तात्पर्य जो भगवान के बनाये हुये संसार को में एक न्यासी के रूप में अपना जीवन यापन करता हो ! अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि ईश्वर की सृष्टि ईश्वर ही…

काल से सभी पराजित हैं : Yogesh Mishra

इस सृष्टि में शिव के अतिरिक्त काल से अधिक सामर्थवान कोई भी नहीं है ! काल को जीतना मनुष्य के पुरुषार्थ का विषय ही नहीं है ! फिर वह चाहे भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध, सिकंदर, चाणक्य, सुकरात आदि कोई भी…

भगवान कहीं नहीं है : Yogesh Mishra

भगवान कहीं नहीं है : Yogesh Mishra दुनिया के सारे धर्म ग्रंथ मानव द्वारा निर्मित हैं ! सभी मंत्र, चालीसा, स्त्रोत, पुराण, उपनिषद, दर्शन, वेदान्त आदि सभी कुछ मनुष्य ने अपनी अनुभूति और समझ के आधार पर निर्मित किये हैं…

ध्यान प्रक्रिया में बदलाव की जरुरत क्यों है : Yogesh Mishra

ध्यान प्रक्रिया हर देश काल परिस्थिती में अलग अलग समय पर अलग अलग रहीं हैं ! आधुनिक मनुष्य का मन मस्तिष्क प्राचीन काल से अलग है ! आज का बदला हुआ चित्त एक बहुत ही नयी घटना है ! कोई…

आपके अंतिम निर्णय पर भगवान का भी अधिकार नहीं है : Yogesh Mishra

कहने को तो अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण के सखा अर्थात मित्र थे ! पर इसके अलावा अर्जुन कृष्ण के बुआ कुन्ती के लड़के अर्थात कृष्ण के बुएरे भाई भी थे ! इसके साथ ही अर्जुन जब अपनी ममेरी बहन सुभद्रा को…

भगवान श्री कृष्ण का ब्रह्म तत्व स्वरूप : Yogesh Mishra

कहने को तो भगवान श्री कृष्ण के विराट व्यक्तित्व का बखान करने के लिये दो ही प्रमाणिक ग्रंथ हैं, जो कि उनके समकालीन लेखक श्री वेदव्यास जी द्वारा लिखे गये थे । पहला महाभारत और दूसरा श्रीमद् भागवत पुराण ।…

संसार भगवान से नहीं विज्ञान से चलता है : Yogesh Mishra

प्राय: यह एक वैष्णव अवधारणा है कि यह संसार भगवान के बनाए नियमों से चल रहा है और जो व्यक्ति भगवान के बनाए नियमों का उल्लंघन करेगा वह नष्ट हो जाता है ! लेकिन व्यावहारिक तौर पर यह देखा गया…

इस संसार में भगवान किसी का सहायक नहीं है : Yogesh Mishra

सभी वैष्णव धर्म शास्त्र कहते हैं कि ईश्वर के भरोसे जीवन नैया सकुशल पार हो जाती है लेकिन व्यवहारिकता की कसौटी पर कसने पर ऐसा पता चलता है कि ईश्वर का भरोसा एक अलग विषय है और संसार का लोक…

भगवान का दर्शन बहुत आसान है : Yogesh Mishra

भगवान का दर्शन बहुत आसान है, बस व्यक्ति का चित्त कमजोर होना चाहिये ! इसीलिए वैष्णव भक्त लोग लंबे उपवास करके चित्त को कमजोर बना लेते हैं ! जिससे कि वह शास्त्रों के अनुरूप जो भी कल्पना कर चुके हैं…