क्या सारा दोष देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों का ही है : Yogesh Mishra

यह एक कटु सत्य है कि आज हमारे राष्ट्र और समाज में जो भी समस्याएं दिखाई दे रही हैं ! इन सब का सबसे अधिक दोषी समाज देश का तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ही है ! क्योंकि यह वर्ग विलासिता का…
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यह एक कटु सत्य है कि आज हमारे राष्ट्र और समाज में जो भी समस्याएं दिखाई दे रही हैं ! इन सब का सबसे अधिक दोषी समाज देश का तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ही है ! क्योंकि यह वर्ग विलासिता का…

आजकल कोविड-19 के प्रभाव से समाज में बहुत बड़े पैमाने में लोगों की आकस्मिक मृत्यु हो रही है ! जिसको लेकर प्राय: लोग यह प्रश्न करते हैं कि यदि मंत्र तंत्र में शक्ति है तो भारत के ऋषि, मुनि, ज्ञानी,…

लोग व्यर्थ ही अपना संपूर्ण जीवन पढ़ने-लिखने में नष्ट कर देते हैं ! अब विज्ञान भी इस बात को मानने के लिए तैयार हो रहा है कि इस ब्रह्मांड में व्याप्त समस्त ज्ञान मानव मस्तिष्क के अंदर पहले से ही…

अयोध्या वैष्णव संस्कृति के विरासत की प्रतिष्ठित नगरी रही है ! यही राजा का जन्म स्थान था तथा यह रामराज्य के यथार्थ का केंद्र भी था ! उस समय समस्त विश्व में वैष्णव सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा यहीं से निर्धारित…

पश्चिम की पैशाचिक संस्कृत ने ज्ञान का आर्थिक मूल्यांकन करके सरस्वती को लक्ष्मी के अधीन कर दिया अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि आज यदि आपके पास धन नहीं है, तो आप उच्च स्तरीय ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते…

आपका धनाड्य होना आपके भाग्य का नहीं पुरुषार्थ का विषय है ! इस संसार में संपन्न होना भी एक कला है ! भारत का दुर्भाग्य रहा है कि भारत में जारी शिक्षा पद्धति में कहीं भी बच्चों को धनाड्य बनने…

प्रश्न ही समाज की धड़कन है ! जिस समाज में प्रश्न खड़े नहीं होते हैं, वह समाज उस मरे हुए व्यक्ति की तरह है ! जिसकी धड़कन बंद हो चुकी है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो एक संवेदनशील…

सूचना है कि सोशल मीडिया के लिये केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन लागू करने के लिये गूगल और फेसबुक जैसी कंपनी तैयार हैं, लेकिन व्हाट्सएप अभी भी पूरी तरह से न मानने के लिये अड़ी हुई है ! दिल्ली हाईकोर्ट…

मोहन भागवत जी द्वारा जो मुसलमान समाज को लेकर हाल ही में बयान दिया गया, उसके उपरांत जो विद्वान जनों की राय सोशल मीडिया पर सामने आई वह भावुकता से भरी हुई तथा एक पक्षीय प्रतीत होती है ! निसंदेह…

‘सत्यमेव जयते’ मूलतः मुण्डक-उपनिषद से लिया गया मंत्र है ! इसका राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार मदन मोहन मालवीय ने उस समय किया था, जब वह अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई “कांग्रेस पार्टी” के सभापति के रूप में अपना दूसरा…