बस ईश्वरीय आदेश के लिये तैयार रहिये !! : Yogesh Mishra

हिमालय में देव ऋषियों का एक समूह है ! जो वस्त्र व भोजन से रहित है ! न तो उन्हें भोजन की आवश्यकता है और न ही वस्त्रो की ! ऋषि कई प्रकार के होते हैं जैसे- राज, महर्षि, देवर्षि…

हिमालय में देव ऋषियों का एक समूह है ! जो वस्त्र व भोजन से रहित है ! न तो उन्हें भोजन की आवश्यकता है और न ही वस्त्रो की ! ऋषि कई प्रकार के होते हैं जैसे- राज, महर्षि, देवर्षि…

आज से 3000 साल पहले जब पश्चिम जगत के लोगों ने सनातन जीवन शैली का परित्याग कर दिया ! तो उसका परिणाम यह हुआ कि मात्र 500 साल के अंदर ही वहां की पूरी की पूरी सामाजिक व्यवस्था ध्वस्त हो…

एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति आज मनुष्य के सर्वनाश का कारण बन रही है ! ऐसी स्थिति में सनातन ज्ञान पीठ ने मनुष्य के स्वास्थ्य लाभ के लिये हर्बल औषधियों के निर्माण हेतु हर्बल वैज्ञानिकों को प्रेरित किया है ! जिसमें हर्बल…

दर्जनों रोगों को ख़त्म करता है यह दिव्य पेय ! अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्रीन पीस इंडिया ने दावा किया कि भारत की चाय में ख़तरनाक कीटनाशकों का अंश है ! जो खतरनाक जहर से भी अधिक खतरनाक है ! दूसरे शब्दों…

आज सनातन शिक्षा पद्धति से चलने वाले विद्यालयों की स्थिति बहुत ही दयनीय है ! इन विद्यालयों में संपन्न माता पिता अपने बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते हैं कि उनका यह मानना है कि सनातन शिक्षा पद्धति की शिक्षा लेने…

कैंसर स्वयं में कोई रोग नहीं है ! हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर कोशिकाओं से निर्मित है ! पुरानी कोशिकायें निरंतर मरती रहती हैं और उनके स्थान पर नई नई कोशिकायें जन्म लेती रहती हैं ! अर्थात अपनी…

आजकल मेडिटेशन को ध्यान बतलाकर पूरे विश्व में करोड़ों रुपये का धंधा किया जा रहा है जबकि मेडिटेशन का तात्पर्य मात्र एकाग्रता से है ! जिसको दूसरे शब्दों में कंसंट्रेशन भी कहा जा सकता है और ध्यान भारतीय सनातन अध्यात्म…

आज हम सभी जानते हैं कि आज हम खाद, यूरिया और कीटनाशक के नाम पर भोजन में विशुद्ध बारूद और जहर का भोजन कर रहे हैं ! जिससे तरह-तरह की रोग पैदा हो रहे हैं ! डायबिटीज, खून की कमी,…

जैसे किसी देश में बहुत से महत्वपूर्ण स्थान होते हैं और जब किसी व्यक्ति को किसी स्थान पर जाना होता है ! तो वह व्यक्ति विशेष रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर उस स्थान की ओर जाने वाली ट्रेन में बैठ…

मात्र मनुष्य को ही नहीं ! प्रकृति ने हर जीव-जंतु, पेड़-पौधे आदि की संरचना इस तरह बनाई है ! यह सभी देश, काल, वातावरण और परिस्थिति के अनुसार धीरे-धीरे अपने आपको प्रकृति के अनुरूप बना सकें ! इसमें सबसे अधिक…