ईश्वरीय कैसे हमारी रक्षा करता है : Yogesh Mishra

 प्रायः लोग मुझसे यह प्रश्न करते हैं कि जब भारत कितना बड़ा आध्यात्मिक देश था, तो भारत अलग-अलग समय में विभिन्न विधर्मियों के अधीन गुलाम कैसे हो गया !

 इस रहस्य को जानने के लिए यह परम आवश्यक है कि हम यह जाने के ईश्वरीय ऊर्जायें कैसे कार्य करती हैं !

ईश्वरी ऊर्जायें तीन तरह से हमारी सहायता करती हैं ! पहला यह कि पृथ्वी पर हमारी मदद के लिए वह अलग-अलग समय में ऐसे संतो को भेजता है, जो हमें ईश्वर के कार्य के योग्य तैयार होने में हमारी मदद करते हैं !

 किंतु दुर्भाग्य यह है कि हम लोग ऐसे लोगों का संदेश सुनकर उस पर अपनी स्वार्थ प्रवृति के कारण कोई कार्य नहीं करते हैं, बल्कि ऐसे दिव्य पुरुषों से अपने क्षणिक लाभ की अपेक्षा करते हैं !

 जैसे कोई इन संतों के पास पुत्र प्राप्ति के लिए जाता है, तो कोई अपनी प्रेमिका की प्राप्ति के लिए जाता है ! कोई व्यक्ति नौकरी प्राप्त करने के लिए जाता है, तो कोई व्यक्ति घर, मकान, संपत्ति आदि प्राप्त करने के लिए जाता है !

 जबकि ईश्वर ने इन महापुरुषों को हमें प्रशिक्षित करने के लिए दिव्य ऊर्जाओं के साथ भेजा है, लेकिन हम प्रशिक्षित होने के स्थान पर इन दिव्य पुरुषों से अपने क्षणिक सांसारिक लाभ प्राप्त करना चाहते हैं ! इसीलिए हम इन महापुरुषों की ऊर्जा का लाभ नहीं उठा पाते हैं !

 दूसरा ईश्वर जो हमारी मदद करना चाहता है तो वह हमारे शत्रु के विरुद्ध कोई महा शत्रु खड़ा कर देता है  ! जैसे भारत को आजादी दिलाने के लिए ईश्वर ने एडोल्फ हिटलर को खड़ा कर दिया ! जिसने यूरोप की पूरी की पूरी अर्थव्यवस्था को ही ध्वस्त कर दिया और भारत यूरोप के चंगुल से आजाद हो गया !

 इसी तरह मुगल काल में ईश्वर ने सिख गुरुओं को पृथ्वी पर भेजा जिन्होंने ऐसी सेना का निर्माण किया कि जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान करके मुगलों को हराकर हमारी मदद की !

इसी तरह जब बौद्ध काल में जब बौद्धों का आतंक बहुत बढ़ गया तब आदि गुरु शंकराचार्य को ईश्वर ने पृथ्वी पर भेजा और उन्होंने भारत के चार कोनों में चार पीठ की स्थापना करके उसके मध्य क्षेत्र से बौद्ध धर्म को उखाड़ फेंका !

 और तीसरा तरीका ईश्वर का होता है, प्राकृतिक आपदा ! जब ऊपर के दोनों उपाये मानवता की रक्षा करने में सक्षम नहीं होते हैं तब ईश्वर अपने प्राकृतिक कहर ढाता है !

 और फिर हड़प्पा, मोहनजोदड़ो जैसी विकसित संस्कृतियां भी पलक झपकते प्राकृतिक आपदाओं से खत्म हो जाती हैं !

लेकिन ईश्वर का काल हमारे मानवीय समय से बहुत ही धीमें चलता है, इसलिए हमें लगता है कि ईश्वर हमारी रक्षा नहीं कर रहा है !

लेकिन सच्चाई यह है कि ईश्वर निरंतर हमारी रक्षा करता है ! वह हमें समय-समय पर पैगंबर भेजता रहता है, लेकिन हम ईश्वर द्वारा भेजे गये पैगंबरों के आदेश का पालन नहीं करते हैं !

तब वह अगले चरण में जाकर हमारी रक्षा के लिए दूसरा कदम उठाता है और अंत में आतताई शक्तियों से हमें बचाने के लिए वह प्राकृतिक आपदाओं या विश्व युद्ध जैसी घटनाओं का सहारा लेता है !

 इससे यह स्पष्ट है कि ईश्वर निरंतर हमारी मदद करने के लिए तत्पर रहता है ! लेकिन हम ही ईश्वर के संदेशों को न सुन कर अपने सर्वनाश का कारण स्वयं बन जाते हैं !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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मोबाईल : 9453092553

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