कभी इस पृथ्वी पर बस सिर्फ शैवों का शासन था : Yogesh Mishra

 जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि आज से 10,000 साल पहले भारत पर वैष्णव आक्रांताओं ने छल पूर्वक अपना नियंत्रण करना शुरू कर दिया था ! जिसे भारत के इतिहास में आर्यों का आगमन कहा गया ! जिससे भारत की शैव संस्कृति को अत्यधिक क्षति हुई !

 कालांतर में वैष्णव गुरुकुलों के द्वारा शैव जीवन शैली के अनुयायी भगवान शिव के भक्त दैत्य,  दानव,  असुर  आदि के नाम से जाने जाने वाले व्यक्तियों को विलेन घोषित कर दिया गया ! जबकि यह सब एक विशेष जीवन शैली थी ! एक विशेष संस्कृति थी !

लेकिन वैष्णव लोगों ने इन शिव भक्तों के विरुद्ध एक षड्यंत्र करके इन्हें समाज का खतरनाक खलनायक घोषित कर दिया और समाज को गुमराह करते हुए योजनाबद्ध तरीके से इन शैव शासकों की हत्या करवाना शुरू कर दिया !

 इस सामूहिक हत्या के कार्य में जिन व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की उन्हें विष्णु का अवतार घोषित करके अतिरिक्त सम्मान दिया तथा उनकी समाज में पूजा आराधना आरम्भ करवा दी ! जैसे राम और कृष्ण आदि !

 जिसका परिणाम यह हुआ कि कालांतर में बहुत बड़ी संख्या में शैव जीवन शैली के अनुयायियों ने भय वश वैष्णव जीवन शैली की अधीनता स्वीकार कर ली और यह लोग वैष्णव के गुलाम बन गये !

जिनका प्रयोग वैष्णव शासकों ने कृषि कार्य हेतु मजदूरों के तौर पर किया या फिर अपने साम्राज्य विस्तार के लिए इन्हें बतौर सैनिक प्रयोग किया !

 जैसा कि आज से मात्र 100 साल पहले अंग्रेजों ने भारतीयों का प्रयोग किया था ! जिसके दम पर अंग्रेजों ने  अपने साम्राज्य विस्तार के लिए 2 विश्व युद्ध लड़े थे !

साथ ही अंग्रेजों की तरह पूर्व में वैष्णव लोगों ने गुरुकुलों की स्थापना की और आने वाली पीड़ियों के मन मस्तिष्क से पूरी तरह शैव जीवन शैली के निशानों को मिटा दिया और इस तरह देखते देखते पूरा एशिया वैष्णव हो गया !

 किंतु इतिहास इस बात का गवाह है कि पूरे एशिया ही नहीं बल्कि समस्त पृथ्वी पर कभी भगवान शिव के अनुयायी शासकों अर्थात शैवों का शासन था ! जिसके साक्ष्य आज भी शिव मंदिर या शिवलिंग के रूप में जगह जगह पुरातत्व विभाग को मिलते हैं !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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