अंतर्यात्रा का परम सूत्र: गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के दर्शन का निचोड़
गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के विचार मनुष्य को भ्रम और धार्मिक मनोरंजन से मुक्त करके आत्म-केंद्रित इन्द्रियगत संकीर्णता से परे ब्रह्मांडीय चेतना और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाते हैं।
उनके दर्शन का मूल संदेश है कि सत्य, सुकून और ईश्वर कहीं बाहर नहीं है, बल्कि मनुष्य के भीतर ही ‘प्राण’ रूप में स्पंदिन कर रहा है।
जब तक हम कृत्रिम मुखौटों, अनियंत्रित अपेक्षाओं और बाहरी भटकाव में उलझे रहेंगे, तब तक जीवन की जटिलताओं और तनाव से मुक्त नहीं हो पायेंगे ।
हमारे अन्दर वास्तविक रूपांतरण तब घटित होता है, जब हम इस शरीर को मात्र हाड़-मांस का ढांचा न मानकर ईश्वर द्वारा निर्मित एक पवित्र मंदिर के रूप में स्वीकार करते हैं और इस शरीर के प्राकृतिक व जैविक नियमों का सम्मान करते हैं।
सादगी से उपजा ‘सुकून’, संपूर्ण चराचर सृष्टि (पशु, पक्षी, वनस्पति) के प्रति ‘संवेदनशीलता’ और आत्म-स्वीकार्यता ही वह मार्ग है जो हमारे भीतर के ईश्वर का हमसे साक्षात्कार करवाता है।
इसलिये बाहरी बैसाखियों और कर्मकांडों को छोड़कर अंतर्मुखी होना ही भटकाव का अंत है और यही सरल, प्रामाणिक एवं पूर्ण जीवन का एकमात्र सत्य है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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