जीवन में शत्रुओं का बहुत महत्व है क्योंकि वह हमें बार बार चुनौती देकर हमें मजबूत और बेहतर बना देते हैं।
यह निरंतर हमें लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विरोध स्वर में प्रेरित करते रहते हैं और हमें अपनी वास्तविक स्थिती से अवगत करवाते रहते हैं ।
शत्रु हमें आलसी नहीं होने देते हैं यह समय समय पर हमें अपने विचारों, मान्यताओं, विषयों और मूल्यों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।
जिससे हमारे अंदर नित्य नई रचनात्मकता और कल्पनाशीलता पैदा होती है, जो हमारे विकास में सहायक होती है।
शत्रुओं की उपस्थिति हमें सतर्क और सजग रहने के लिए निरंतर प्रेरित करती रहती है, जिससे हम खतरनाक स्थितियों से बचने के लिये सदैव पहले से तैयार रहते हैं।
शत्रु हमें भावुकता से मुक्त कर सही और गलत के बीच अंतर करने और सही निर्णय लेने के लिये हमें बौद्धिक रूप से मदद करते हैं। जिससे हमारी सामाजिक परिपक्वता बढ़ती है !
अत: जो व्यक्ति निरंतर शत्रुओं से घिरा रहता है, वह व्यक्ति निरंतर बुद्धिमान और मजबूत होता चला जाता है।
इसलिये यह जान लीजिये कि जीवन में शत्रुओं का विशेष महत्व है। वह हमें निरंतर चुनौती देते हैं और हमारे व्यक्तित्व को विकासित करने में हमारी सहायता करते हैं ! जिससे हम परिपक्व होकर लक्ष्य को प्राप्त करते हैं !
इसलिए, शत्रुओं को नकारात्मक नहीं समझना चाहिए, बल्कि उन्हें एक अवसर के रूप में देखना चाहिए जो हमें बेहतर इंसान बनने में मदद करते हैं !
इसी को भक्तिकाल के प्रसिद्ध महाकवि कबीर दास ने अपने दोहे में कहा है !
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय, बिन पानी, बिन उज्जला, निर्मल करे सुभाय !!
अर्थात जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिक से अधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना उज्ज्वला (साबुन) और पानी के हमारी कमियां बता कर, हमारे स्वभाव को निर्मल कर देता है।!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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