एक डॉलर पर इल्यूमिनिटी का निशान, खूनी लाल चन्द्र ग्रहण, उसके बाद कहीं न कहीं युद्ध और युद्ध में डालर की कीमत बढ़ना इन सब का आपस में क्या सम्बन्ध है ?
एक डॉलर के नोट पर ‘इलुमिनाटी’ का निशान जिसे बताया जाता है कि 1782 में अमेरिका की ‘ग्रेट सील’ द्वारा 6 करोड़ रेड इंडियन्स की बलि के बाद अपनाया गया था !
यह माया क्षेत्र के भोग के देवता शुक्राचार्य की आंख का निशान सीधे सीधे प्राचीन भारतीय अघोर तंत्र संकर्षण विद्या “कबाला” जिसे मुख्य रूप से यहूदी धर्म ने अपने विस्तार के लिये लगभग 4,000 साल पहले अपना लिया था ! यह एक प्राचीन, रहस्यवादी और गूढ़ विद्या है।
इसका सीधा सम्बन्ध खूनी चन्द्रमा से है ! जब जब पूर्णिमा का चाँद खूनी होता है तब तब इस तंत्र विद्या का प्रयोग किया जाता है और खूनी चन्द्रमा तामसिक शक्तियों की वृद्धि के लिये प्रयोग होता है।
जिन तमस शक्तियों को अपना समर्थ बढ़ाने के लिये लाश और रक्त चाहिये होता है ! इसलिये जब जब खूनी लाल चन्द्रमा होता है, तब तब युद्ध के द्वारा इन तामसिक शक्तियों के सामर्थ की वृद्धि के लिये युद्ध किये जाते हैं !
जिससे यह तामसिक शक्तियों बलवान होकर अनुष्ठान करने वाले के धन के मूल्य की वृद्धि और साम्राज्य विस्तार में सहायता करती हैं !
लेकिन अब शिव के युग परिवर्तन की अदालत लग चुकी है, अब तंत्र के पुराने हथकंडे काम नहीं आयेंगे, यह संक्रमण काल है ! जो पुरानी सभी व्यवस्था को नया आयाम देगी इसका असर वैश्विक स्तर पर दिखलाई भी दे रहा है ! इसलिये आदि आप भविष्य के प्रभावी तंत्र विधान के विज्ञान को जानना चाहते हैं तो कमेन्ट कीजिये !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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