समाज को वैष्णव ने अनावश्यक तंत्र से डरा कर रखा है, जबकि तंत्र भगवान शिव द्वारा मानव को बतलाया गया “लोक कल्याण का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान” है ! जो इस रहस्यमय गूढ़ ज्ञान को समझ लेता है, उसे जीने की कला आ जाती है और उसके जीवन में तनाव और चिंता ख़त्म होकर, उसके जीवन का संघर्ष ही ख़त्म हो जाता है !
उसके मन-शरीर का तालमेल बेहतर हो जाता है, जिससे उसमें जीवनी ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है, और उस व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास तेजी से होने लगता है !
तंत्र के नियमित अभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और नींद आने में लगने वाला समय भी कम हो जाता है ! जिससे व्यक्ति की याददाश्त बेहतर हो जाती है ! व्यक्ति का हृदय स्वास्थ्य, रक्तचाप और इम्युनिटी में सुधार हो जाता है !
स्वास्थ्य बेहतर होने से, वह अपने चेतना की उच्च अवस्था को प्राप्त कर लेता है ! जिससे उसके ध्यान की गहराई बढ़ जाती है और जिससे उसे अपने जीवन में विचारों की स्पष्टता प्राप्त होती है और उसका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो जाता है ! उसे जीवन की समस्याओं को समझने में और उसका समाधान खोजने में आसानी हो जाती है ! जिससे जीवन का संघर्ष ख़त्म हो जाता है !
साथ ही तंत्र के नियमित अभ्यास से दुःख से जुड़ी भावनाओं पर व्यक्ति का नियंत्रण हो जाता है और व्यक्ति शाररिक और मानसिक कष्ट से मुक्त हो जाता है ! इससे व्यक्ति में सकारात्मक भावनाएं विकसित हो जाती हैं !
और व्यक्ति अपने जीवन में क्रोध, चिंता और अज्ञात भय को नियंत्रित करके नकारात्मकता से निकल कर सकारात्मक जीवन शैली को अपना कर अपने जीवन को संपन्न, समृद्ध और खुशहाल बना लेता है ! जिससे व्यक्ति के जीवन के सभी आभाव समाप्त हो जाते हैं !
इस तरह जब तंत्र का साधक स्वयं में सुव्यवस्थित हो जाता है, तब वह दूसरों के लिए भी एक अच्छा मार्गदर्शक बन कर समाज का कल्याण कर पाता है ! जिसे उसे “कालजयी यश” प्राप्त होता है !
इसलिये आप तंत्र से डरिये या भागिये नहीं, बल्कि तंत्र का सही ज्ञान लेकर अपना ही नहीं दूसरों का भी कल्याण कीजिये ! यही भगवान शिव की इच्छा है ! इसी से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होगा ! यही वास्तविक शिव साधना है !
तंत्र को समझने और उसका अपने जीवन में लाभ उठाने के लिये “ब्रह्मास्मि क्रिया योग” की साधना कीजिये ! यह आपके कल्याण के लिये मेरा सुझाव है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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