सांसारिक व्यक्तियों को तत्वज्ञानियों से दूरी बनाकर रखना चाहिए ! क्योंकि तत्व ज्ञानी आपके उस “अहंकार” को खा जाता है, जो इस संसार में आपकी पहचान है !
अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाए तो तत्वज्ञानी इस संसार में आपकी पहचान को ही खा जाता है और आपको इस संसार में जीवित रहते हुए भी मृत प्राय अर्थात विदेह की अवस्था को प्राप्त करवा देता है !
जैसे तत्वज्ञानी अष्टावक्र के संपर्क में आने पर ज्ञान के जिज्ञासा और अहंकार से ओतप्रोत राजा जनक का अहंकार नष्ट हो गया और उन्हें विदेह की अवस्था प्राप्त हो गई थी !
विचार कीजिये आप एक सांसारिक व्यक्ति हैं, आपका अपना एक परिवार है ! जिसमें आपका अपने माता-पिता, पत्नी, बच्चे के प्रति एक कर्तव्य है ! यदि आप तत्व ज्ञानियों के प्रभाव में आकर विदेह की अवस्था को प्राप्त कर लेंगे, तो आप पर आश्रित सदस्यों का पोषण कौन करेगा !
इसलिए जब तक आप अपने पारिवारिक दायित्वों से मुक्त नहीं हो गये हैं, तब तक मात्र जिज्ञासावश तत्व ज्ञानियों के संपर्क में नहीं आना चाहिए ! क्योंकि यह तत्वज्ञानी आपके अहंकार को नष्ट कर देते हैं और आपको स्व में स्थिर कर देते हैं ! स्व में स्थिर व्यक्ति सांसारिक जीवन में असफल हो जाता है क्योंकि कि उसमें संसार में संघर्ष करके कुछ प्राप्त करने की इच्छा ही ख़त्म हो जाती है !
इसलिये सांसारिक व्यक्ति को तत्व ज्ञान की जगह वैकल्पिक सामाजिक व्यवस्था “भक्ति” में ही संतोष करना चाहिए और अपने सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करना चाहिए !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये
www.sanatangyanpeeth.in
