( विशेष शोध लेख )
वैसे तो दीपावली धन आगमन के लिए अनुष्ठान करने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है और करोड़ों लोग दीपावली में धन आगमन के लिए तरह-तरह की पूजन भी करते हैं !
किंतु अनुभव में यह आया है कि इस दीपावली में की जाने वाली पूजा से जीवन में धन आगमन के विषय को लेकर बहुत परिवर्तन नहीं दिखाई देता है ! आज इसके मुख्य कारण पर चर्चा करते हैं !
दीपावली पर धन आगमन के अनुष्ठानों का लाभ न मिलने का सबसे पहला मुख्य कारण यह है कि दीपावली अमावस्या के दिन होती है ! अमावस्या शैव तंत्र विधान से अनुष्ठान करने का सर्वश्रेष्ठ दिन है !
लेकिन लोग अज्ञानता वश धन आगमन के लिए इस दिन वैष्णव पूजन अनुष्ठान करने लगते हैं, इसलिए उनके अनुष्ठान असफल हो जाते हैं !
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि धन के तीन स्वरूप हैं ! पहला आगमन, दूसरा वृद्धि, तीसरा स्थिरता !
जो सभी विधान धन आगमन की वैज्ञानिक विधि द्वारा तंत्र साधना से नियंत्रित हैं !
अर्थात जो युवा अभी धन आगमन के स्रोतों को स्थाई रूप से विकसित नहीं कर पाये हैं, उन्हें धन आगमन के लिए लक्ष्मी स्थान पर अनुरागिणी यक्षिणी साधना करनी चाहिए ! इससे धन आगमन के मार्ग तुरंत खुलते हैं और व्यक्ति के जीवन में संपन्नता विकसित होना तुरंत शुरू हो जाती है !
दूसरी महत्वपूर्ण बात धन की आराधना के लिए प्राय: लोग माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं ! माता लक्ष्मी धन को चंचलता पूर्ण गति से विकसित करती हैं !
जबकि देखा गया है कि प्राय: सभी हिंदुओं द्वारा माता लक्ष्मी के धन आगमन के इसी स्वरूप की पूजा की करते हैं, किंतु यह स्वरूप मात्र उन्हीं लोगों के लिए है, जिन्होंने या तो पैतृक संपत्ति प्राप्त कर ली हो या किसी अन्य पध्यति से धन के आगमन के स्वरूप को विकसित कर लिया हो ! माता लक्ष्मी की पूजा मात्र अपने संग्रहित धन को विकसित करने के लिए करनी चाहिए ! जो सभी वैश्य समाज करते हैं !
शेष अन्य के लिए दीपावली में लक्ष्मी पूजन व्यर्थ है ! क्योंकि दीपावली अमावस्या के दिन होती है ! अतः दीपावली में विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी की पूजा से कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं होता है !
बल्कि इसके स्थान पर यदि धन प्राप्ति के लिए यक्षिणी अनुरागिणी की आराधना की जाये तो वह अमावस्या की शैव ऊर्जा के कारण तत्काल धन लाभ देने वाली होती हैं !
तीसरा धन आगमन के उपरांत हमारे पास स्थाई रूप से बना रहे, इसके लिए यक्ष राज देवताओं के धन रक्षक कुबेर की आराधना करनी चाहिए ! जिसकी वैज्ञानिक पद्धति लक्ष्मी साधना से एकदम अलग है !
किंतु मैं देखता हूं कि दीपावली के अवसर पर जिनके पास धन नहीं है, वह लोग भी याक्षणी साधना के स्थान पर लक्ष्मी आराधना करते हैं !
जिनके पास धन है, वह तो लक्ष्मी की आराधना करते ही हैं और जो लोग धन को स्थिर रखना चाहते हैं, वह लोग भी लक्ष्मी की ही आराधना करते हैं ! जो की कुबेर तंत्र साधना पद्धति से एकदम विपरीत है !
इसीलिए संपन्नता के लिए दीपावली पर धन आगमन के अनुष्ठान असफल हो जाते हैं !
विशेष :- यदि आपको धन आगमन के लिए विशेष अनुष्ठान पद्धतियों की जानकारी नहीं है, तो आप संस्थान के कार्यालय में संपर्क करके दीपावली के अवसर पर अपने लिए विशेष अनुष्ठान करवा सकते हैं !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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मोबाईल : 9453092553
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