हमारे मस्तिष्क का सीधा संबंध हमारी उंगलियों से है ! इस रहस्य को भगवान शिव ने तंत्र मुद्रा विज्ञान में हजारों साल पहले मनुष्य को बतला दिया था !
इसीलिए उंगलियों पर बनने वाली आकृति और हमारे मस्तिष्क के अंदर का पैटर्न एक जैसा होता है ! इसीलिये किसी भी व्यक्ति के उंगलियों पर बनने वाली आकृति से उसके मस्तिष्क के पैटर्न को जाना जा सकता है !
जिससे किसी भी व्यक्ति के विकास या विनाश की भविष्यवाणी भी की जा सकती है !
और एक विशेष बात यह है कि “ब्रह्मास्मि क्रिया योग” के “तंत्र मुद्रा” में कुछ ऐसे विधान बतलाये गये हैं कि हम अपने उंगलियों के पैटर्न को बदलकर अपने ऊपर होने वाले ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को समाप्त कर सकते हैं या उन नकारात्मक प्रभावों को सकारात्मक प्रभाव में बदल सकते हैं !
जिससे व्यक्ति के जीवन के सभी तरह के संघर्ष समाप्त हो सकते हैं ! जिन्हें मैने सैकड़ों केस में प्रयोगात्मक अजमाया है !
जिससे कोई भी व्यक्ति ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को अपने मानसिक अभ्यास से सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर सकता है !
और अपने जीवन को दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तरह की समस्याओं से मुक्त कर परम आनंद की अवस्था को प्राप्त कर सकता है !
किंतु इस सर्व लोकप्रिय अति महत्वपूर्ण विज्ञान को वैष्णव आक्रांताओं ने समाज को अपना गुलाम बनाने के लिए इस विद्या को समाज से पूरी तरह विलुप्त कर दिया है !
इस गुप्त विद्या का पुनः स्थापन करने के लिए बहुत जल्द ही सनातन ज्ञान पीठ एक विशेष सत्र आयोजित करने जा रही है ! जिसमें 112 में से सात गुप्त विधाओं का पुनः स्थापन किया जाएगा !
जो मनुष्य की मूल आवश्यकताओं से सम्बंधित हैं ! जो सातों ग्रहों की ऊर्जा को नियंत्रित करती हैं !
जो साथी इस परम गुप्त शैव विद्या को जानना या सीखना चाहते हैं ! वह संस्थान में संपर्क करके अपना पंजीकरण करवा सकते हैं !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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मोबाईल : 9453092553
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