तीन दरिद्र थे ! एक प्राइमरी स्कूल का चपरासी, दूसरा अनपढ़ गृहस्थ महिला और तीसरा इन दोनों को सलाह देने वाला एक सूदखोर ज्योतिषी !
एक बार ज्योतिषी के मन में यह विचार आया कि मैं अपने आय को कैसे बढ़ाऊँ !
उस ज्योतिषी ने यह विचार किया कि मैं लोगों की कुंडली में शादी का महूर्त बतलाता हूँ ! अत: मुझे पहले से पता होता है कि किस दिन किस व्यक्ति की शादी कहाँ होने है !
अगर मैं एक घोड़ा की व्यवस्था कर लूँ तो यह अनपढ़ औरत अपने गृहस्थी से बचे हुए समय में उस घोड़े की सेवा करती रहेगी !
और बदले में जो लोग मुझे उल्टा सीधा समान “दान” में दे जाते हैं, उसे उपहार स्वरूप देता रहूंगा, जिससे वह मुफ्त में खुश बनी रहेगी !
और घोड़े को जब शादी में ले जाना होगा, तब शाम के समय यह प्राइमरी स्कूल का चपरासी उस घोड़े को बुकिंग में ले जाया करेगा ! घोड़े की बुकिंग का मोटा पैसा मुझे मिलेगा और नेग आदि के पैसे में यह चपरासी खुश बना रहेगा !
यह सोचकर ज्योतिषी ने उस सीधी-सादी गृहस्थ महिला और उस प्राइमरी स्कूल के चपरासी को अपने बातों के माया जाल में फंसाया !
और उन दोनों से पैसा लेकर गाँव के एक संपन्न व्यक्ति से उसका घोड़ा खरीद लिया !
अब वह अनपढ़ गृहस्थ औरत रातों दिन उस घोड़े की सेवा करने लगी ! प्राइमरी स्कूल के चपरासी खाली समय में उस घोड़े को घुमाने ले जाया करता था !
ज्योतिषी जी अब नए-नए कस्टमर की तलाश में प्रयास शुरू करने लगे ! धीरे धीरे 3 महीने बीत गए !
लेकिन ज्योतिषी जी को उस घोड़ की कोई भी बुकिंग किसी भी शादी में नहीं मिली ! इधर गृहस्थ महिला भी घोड़े की सेवा कर कर के परेशान हो चुकी थी और वह प्राइमरी स्कूल का चपरासी अनावश्यक रूप से घोड़े की सेवा करते हुए ऊब चूका था !
अब तीनों ने मिलकर एक गरीब व्यापारी से अपनी समस्या बतलाई, उसने उन्हें बाजार में ऊंची कीमत पर घोड़ा बेचने की सलाह दी !
तीनों मिलकर घोड़ा बेचे गए ! अनुभवहीनता के कारण महीनों घूमने के बाद भी जिस रेट पर इन्होंने घोड़ा खरीदा था ! उस रेट पर कोई घोड़ा लेने को तैयार नहीं था !
कुछ दिनों बाद परेशान होकर तीनों ही आपस में लड़ने लगे और वह घोड़ा तीनों के लिए गले का जंजाल बन गया था !
रोज-रोज तीनों को आपस में झगड़ता देखकर गांव के सेठ को सूचना मिली कि घोड़े को लेकर हो रहे नुकसान की वजह से यह तीनों रोज लड़ाई करते हैं !
सेठ ने उन तीनों मूर्खों को अपने पास बुलाया और कहा कि अगर घोड़ा से तुम्हें आर्थिक नुकसान हो रहा था और तुम घोड़ा नहीं पालना चाहते थे, तो मुझे बतलाते ! जितने पैसे में तुमने घोड़ा लिया था, मैं इतने पैसे में अपना घोड़ा वापस ले लेता, इसके लिए इतना लड़ने की क्या जरूरत थी !
तब ज्योतिषी ने कहा हमें यह विश्वास ही नहीं था कि आप अपना घोड़ा वापस ले लेंगे ! तब उसे सेठ ने जवाब दिया कि “तुम्हारा अविश्वास ही तुम्हारी दरिद्रता की वजह है !”
अगर तुमने दरिद्रों से परामर्श लेने की जगह मुझ जैसे संपन्न व्यक्ति पर विश्वास किया होता तो गली-गली भटकना नहीं पड़ता और तुम्हारी समस्या का समाधान तुम्हारे घर बैठे हो जाता ! मात्र मुझसे बात करके !
क्योंकि इस घोड़े की रकम तुम्हारे जैसे दरिद्रों के लिए बहुत बड़ी रकम होगी, लेकिन मेरे लिए यह कोई बड़ी रकम नहीं है ! यह पैसे लो और घोड़ा छोड़ जाओ !
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जब कोई सामाजिक या आर्थिक समस्या हो तो किसी दरिद्र से परामर्श नहीं लेना चाहिए, नहीं तो वह आपको और नई नई समस्या में डाल देता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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