प्रायः लोग मुझसे पूछते हैं कि ब्रह्मास्मि क्रिया योग क्या है ? ब्रह्मास्मि क्रिया योग वास्तव में एक मानसिक यज्ञ है !
जिस तरह अग्नि सभी विकारों को जलाकर नष्ट कर देती है ! ठीक उसी तरह ब्रह्मास्मि क्रिया योग की साधना करने वाले व्यक्ति के अंदर आहार-विहार-विचार-संस्कार-परिवेश के प्रभाव से जो कामना और वासना के विकार पैदा होते हैं, वह इस साधना से स्वत: ही ब्रह्म ऊर्जा की अग्नि में जलकर नष्ट हो जाते हैं !
इस तरह अपने विकारों को ब्रह्म ऊर्जा की अग्नि में जलाकर नष्ट कर देने का विज्ञान ही ब्रह्मास्मि क्रिया योग साधना है !
और जब व्यक्ति के विकार ब्रह्म ऊर्जा की अग्नि में जलकर नष्ट हो जाते हैं ! तब व्यक्ति निर्विकार रूप से सरल और सहज हो जाता है ! उस स्थिति में उसे अपने अंदर पूर्व से ही स्थापित ईश्वरी उर्जा की अनुभूति होने लगती है और व्यक्ति उसी ईश्वरीय अंश अनुभूति के द्वारा ईश्वर को प्राप्त कर लेता है !
इस तरह ब्रह्मास्मि क्रिया योग अपनी सभी परा और अपरा कामनाओं और वासनाओं को नष्ट करके ईश्वर को प्राप्त करने का विज्ञान है !
इसी को भारत के महान दार्शनिक श्रीअरविंद जी ने कहा है कि “यह संपूर्ण जीवन, संपूर्ण विश्व प्रकृति का पुरुष को अर्पण किया जाने वाला यज्ञ है ! जब तक हम अहंकार के अधीन हैं, तब तक हम अहंकार की तृप्ति के लिए और अहंकार की भावना में, यज्ञ से भिन्न प्रकार कर्म करते हैं ! जिससे हम अहंकार के बंधन में और बंधते चले जाते हैं ! जबकि व्यक्ति को ब्रह्म ऊर्जा की साधना द्वारा इस विकार को नष्ट कर देने चाहिये !”
यही ब्रह्म ऊर्जा की साधना द्वारा विकारों को नष्ट कर देने का विज्ञान ही ब्रह्मास्मि क्रिया योग का विज्ञान है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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