परशुराम जयंती पर विशेष लेख
जब किसी भी समाज के प्रबुद्ध चिन्तक वर्ग के तर्क, शास्त्र और वास्तविक ‘तत्व बोध’ का विरोध शुरू हो जाये तो उस राष्ट्र को नष्ट होने से कोई नहीं बचा सकता है !
जहां योजना बद्ध तरह से केवल विदेशी नैरेटिव और मानसिक गुलामी समाज में बल पूर्वक डाली जा रही है। उस समाज का पतन सुनिश्चित है !
आज ब्राह्मणों के खिलाफ विदेशी संस्थाएं मानवाधिकार या अकादमिक विमर्श की आड़ में आंतरिक विमर्श के नाम पर खुले आम फंडिंग कर रही हैं, उनका उद्देश्य भारत के बौद्धिक और सांस्कृतिक आधार को मनोवैज्ञानिक रूप से विभक्त करके भारतीय समाज को कमजोर कर नष्ट कर देना है। जिससे यह विदेशी एजेंसियां भारत के प्राकृतिक संसाधनों पर अपना नियंत्रण कायम कर सकें !
इसलिये पश्चिमी देशों के कई संस्थान, धार्मिक मिशनरी संगठन और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएं भारत में ‘दलित अधिकारों’, ‘मानवाधिकारों’ और ‘सामाजिक न्याय’ के नाम पर काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों को भारी आर्थिक अनुदान देती हैं। भारत सरकार लगातार ऐसी संदिग्ध फंडिंग पर कार्रवाई भी करती रही है।
अभी हाल ही में पश्चिमी विश्वविद्यालयों में ‘क्रिटिकल कास्ट थ्योरी’ के मनगढ़ंत सिद्धान्त से भारतीय समाज को अस्थिर करने का प्रयास किया था।
इसका उद्देश्य भारतीय समाज के ऐतिहासिक बौद्धिक वर्ग को वैश्विक स्तर पर एक ‘शोषक’ के रूप में स्थापित करना है। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों की शोषण नीतियों की तरफ समाज का ध्यान न जाये !
जिससे अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां और कॉर्पोरेट जगत आयुर्वेद, ध्यान, न्यूरोबायोलॉजिकल संतुलन की प्राचीन विधियों और प्राकृतिक जीवन शैली को ‘पेटेंट’ या अपने नये आवरण में बेच सकें, कोई इनका विरोध करने वाला न हो ! यह ज्ञान के मूल स्रोत को नष्ट करने का षडयंत्र कर रहे हैं।
प्रबुद्ध समाज के साक्ष्य और शास्त्रों के नष्ट हो जाने पर समाज का तथाकथित चिंतनशील वर्ग स्वयं अपनी ही संस्कृति में एक ‘अजनबी’ की तरह व्यवहार करेगा और पश्चिमी मापदंडों से मान्यता मांगेगा, जिस मान्यताओं को देने का वह मन चाहा मूल्य ले सकेंगे ! वैसे आज भी कम मात्रा में ही सही पर पेटेंट के नाम पर हम उन्हीं से मान्यता मांग रहे हैं !
इस तरह के नकारात्मक विचार और इतिहास की विकृत व्याख्याओं के निरंतर प्रवाह से मनोवैज्ञानिक रूप युवाओं में आतंरिक विरोध बढ़ेगा, जिससे सामाजिक ‘संवाद’ समाप्त हो जायेगा और समाज में केवल टकराव पैदा होगा। यह आतंरिक कलह इन विदेशियों के लिये धन उपार्जन का बहुत बड़ा अवसर बनेगा !
इसलिये वह लोग ब्राह्मणों के विरोध पर 19वीं सदी से आज तक विदेशी एजेंसियां के माध्यम से पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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