हमारा शरीर हार्मोन से संचालित होने वाली एक मशीन है और यह मशीन अपने को चलाने के लिए देश काल परिस्थिती के अनुरूप समय समय पर कुछ विशेष हार्मोन पैदा करती है। जिससे सुरक्षा का एक मानसिक भ्रम पैदा हो ! भगवान भी उसी मानसिक भ्रम का स्वरूप है।
आइए इसे कुछ आसान शब्दों में समझते हैं:
जब कोई व्यक्ति आंखें बंद करके ध्यान लगाता है, ईश्वर की मूर्ति के सामने बैठता है या प्रार्थना करता है, तो उसके दिमाग की भाग दौड़ शांत होने लगती है। इस मानसिक शांति से मस्तिष्क में ‘सेरोटोनिन’ नाम का रसायन बढ़ता है।
यह वही रसायन है जिसकी कमी से इंसान को तनाव या डिप्रेशन (अवसाद) होता है। भगवान का ध्यान करते ही यह रस बढ़ता है और इंसान को गहरी शांति महसूस होती है।
जैसे एक माँ अपने बच्चे को गले लगाती है, तो जो प्यार का रसायन शरीर में बहता है, उसे ऑक्सीटोसिन कहते हैं। जब एक भक्त भगवान के प्रति पूरा समर्पण भाव रखता है और यह सोचता है कि “मैं अकेला नहीं हूँ, कोई परम शक्ति मेरे साथ है,” तो यही ऑक्सीटोसिन हार्मोन भक्त के दिमाग में भर जाता है। इससे इंसान को ब्रह्मांड के हर जीव से एक जुड़ाव और प्यार महसूस होने लगता है।
जिससे व्यक्ति का अकेलापन धीरे धीरे समाप्त हो जाता है, और व्यक्ति काल्पनिक सुरक्षा महशूस करने लगता है ! जो वैसा ही सुकून है, जैसे शुतुरमुर्ग रेत में मुंह छिपा कर सोचता है, वह दुश्मन से बच गया !
जब इसी क्रम को रोज निर्धारित समय पर बार बार अपनाता है, भजन गाते हैं या मंत्र पढ़ते हैं, तो भक्त को अच्छा लगता है, जिससे दिमाग ‘डोपामाइन’ नाम का हार्मोन छोड़ता है। यह हमें ‘इनाम’ मिलने जैसी खुशी महशूस होती है। यही रसायन हमें बार-बार भगवान की तरफ खींचता है, जिसे हम आम भाषा में ‘लगन’ कह देते हैं। यह वही हार्मोन है जो बच्चों में वीडियो गेम खेलने की लत पैदा करता है !
आगे चलाकर जब ‘डोपामाइन’ की लत चरम पर होती है तब शरीर में ‘एंडोर्फिन’ हार्मोन पैदा होने लगता है, जिससे यह रसायन शरीर के सारे दर्द और शारीरिक कष्टों को सुन्न कर देता है और इंसान को एक अजीब से परमानंद की अनुभूति होती है।
इसका मतलब भगवान की अनुभूति बस सिर्फ एक ‘केमिकल लोचा’ है, इसके अलावा कुछ नहीं है !!
लेकिन यह विपरीत परिस्थितियों में बहुत मानसिक सुकून देता है इसलिये इसे सामाजिक मान्यता अनादि काल से दी गयी है !!
विशेष : इसलिये अगर वास्तविक परिणाम बदलने हैं, तो भक्ति नहीं अनुकरण से तंत्र का अभ्यास कीजिये !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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