मस्जिद अल- अक्सा के संघर्ष का कारण

अब्बासी यहूदियों का एक विद्रोही समूह था। जिन्होंने अपने को मुस्लिम घोषित किया और मध्य पूर्व एशिया में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया जिसे आज भी “खिलाफत साम्राज्य” के नाम से जाना जाता है।

मुस्लिम शब्द अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है “ईश्वर के प्रति समर्पित” या “जो शांति चाहता है”। यह शब्द इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए प्रयोग होता है, जो अल्लाह (ईश्वर) की इच्छा के आगे समर्पण करते हैं।

मुस्लिम को मानने वाले आज मुसलमान नाम से जाने जाते हैं । इनकी आस्था एक मात्र धर्म ग्रन्थ “कुरान” में है ।

मुस्लिम एक बहुत ही व्यवस्थित और संगठित धर्म है, जिसका एक मात्र उद्देश्य विश्व में इस्लाम की स्थापना करना है ।

जो खलीफाओं और मौलवियों द्वारा नियंत्रित और संचालित है । यह धर्म श्रुति और स्मृति आधारित है । इसीलिये इसके इतिहास का कोई ठोस प्रमाण आज तक नहीं ढूंढा जा सका है ।

यहूदी इतिहासकार तो यहाँ तक कहते हैं कि इस्लाम के इतिहास में आयशा, हबसा, सोना आदि सभी इस्लाम के काल्पनिक पात्र हैं और न ही मनुखुरेजा में जो 800 लोग मारे गये थे, उन पर कभी किसी मोहमद नाम के व्यक्ति ने आक्रमण किया था ।

यहूदी इतिहासकारों का तो यह भी कहना है कि अब्बासी यहूदियों (अर्थात यहूदी धर्म से विद्रोह के कारण निकले गये यहूदी) द्वारा आम यहूदी धर्म से अलग हट कर एक अपनी अलग सल्तनत बनाने के लिये एक कपोलकल्पित धर्म खड़ा किया गया ।

जिसकी राजधानी यरूशलेम से अलग हट कर बगदादा बनाई गयी । क्योंकि इस्लाम के संस्थापक अब्बासी यहूदियों ने इसाई संस्थापक ईसा मसीह का यहूदियों से अलग हो जाने के कारण उनका बुरा हाल देख लिया था । इसलिये यह लोग यरूशलेम से भाग कर बगदाद और बगदाद को राजधानी बनाया । जहाँ पूरे एशिया से लूट कर दौलत इकट्ठी की गयी । जिसे बाद में मंगोलियों ने इनसे लूट लिया ।

इसीलिये यहूदियों मुस्लमान और इसाई तीनों ही आज भी यरूशलम (क़ुद्स) की अल-अक्सा मस्जिद को पवित्र स्थल मानते हैं।

इस्लाम धर्म में मक्का और मदीना के बाद यरूशलम (क़ुद्स) की अल-अक्सा मस्जिद तीसरा पवित्र स्थल है। जबकि मक्का से अल-अक्सा मस्जिद की दूरी लगभग 1500 km है और बगदाद से यह दूरी 1000 किलो मीटर है ।

इस्लाम के ज्ञात इतिहास में पैग़ंबर मुहम्मद भी अपने जीवनकाल में यरूशलम (क़ुद्स) की अल-अक्सा मस्जिद कभी नहीं गये ।

यरूशलम पैग़ंबर मुहम्मद के जीवनकाल के दौरान और उनकी मृत्यु के तुरंत बाद के वर्षों के दौरान एक दूरदर्शी इस्लामिक प्रतीक रहा है ।

जैसा ही मुस्लिमों ने इराक़ और उसके बाद सीरिया को नियंत्रित किया तब यरुशलम 640 ईस्वी के दशक में मुस्लिमों के नियन्त्रण आया था । जिसके बाद खलीफाओं के मार्गदर्शन में यरूशलम एक मुस्लिम शहर बन गया और यरूशलम में अल अक्सा मस्जिद मुस्लिम साम्राज्य में सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल घोषित कर दिया गया ।

जबकि यहूदी इसे अपने मंदिर होने का दावा करते हैं। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार 957 ईशा पूर्व में यहूदीयों ने यरूशलम में पहला यहूदी मंदिर (तंत्र पीठ) बनाया था और उसके बाद 352 ईशा पूर्व में दुबारा (तंत्र पीठ) यहूदी मंदिर बनावाया। इसके बाद यहूदियों के कमजोर पड़ने पर 561 ईश्वीं में ईसाइयों ने यरूशलम में ही सेंट मेरी चर्च का निर्माण किया।

तब से ही मस्जिद अल- अक्सा और यरूसलम यहूदी और मुसलमानों के लिए प्रमुख संघर्ष स्थल रहा है। मुस्लिम, ईसाई और यहूदी सभी के साथ मस्जिद के नीचे की जमीन को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है।

क्योंकि वह पृथ्वी के एक ऐसे केंद्र पर स्थित है जहाँ से प्राप्त तंत्र की ऊर्जा से इस सम्पूर्ण पृथ्वी के संसाधनों को कब्ज़ा किया जा सकता है । यह रहस्य यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों के धार्मिक तंत्र गुरु जानते हैं । इसीलिये उस जमींन पर 2000 सालों से संघर्ष चल रहा है ।।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये

www.sanatangyanpeeth.in

Share your love
yogeshmishralaw
yogeshmishralaw
Articles: 2491

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *