मुक्ति की कामना से बड़ी मुर्खता कोई नहीं है

केवल अपने दुखों और संघर्षों से घबराकर आत्म सुधार की जगह जन्म-मरण से मुक्ति की चाह रखना एक प्रकार का मानसिक पलायन ही है।

ईश्वर का आदर्श और अवतार का मर्म समझे बिना इस तरह की कामना करना मानसिक रोग है ! स्वयं परमेश्वर जब धर्म की स्थापना, समाज के कल्याण और व्यवस्था के सुचारु संचालन रूपी अपने कर्तव्यों के निर्वहन हेतु बार-बार इस धरती पर अवतार लेते हैं, तो मनुष्य का केवल अपने व्यक्तिगत मोक्ष के लिए संसार से भागना कैसे उचित हो सकता है?

यदि पूर्ण और मुक्त परमात्मा सृष्टि के चक्र में उतरकर कर्म कर सकता है, तो मनुष्य का अपने कर्मों और दायित्वों से मुँह मोड़ना अध्यात्म नहीं, बल्कि स्वार्थ है।

सच्चा पुरुषार्थ पलायन में नहीं, कर्तव्य में है: जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य संसार को छोड़कर भागना नहीं, बल्कि पुरुषार्थ है। लोककल्याण, समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन और प्रकृति के संवर्धन के लिए निरंतर कर्म करना ही सबसे बड़ी साधना है।

जो व्यक्ति कर्तापन के अहंकार को छोड़कर, स्वयं को केवल एक निमित्त मानकर अपने कर्तव्य पथ पर डटा रहता है, वह तो वैसे ही मुक्त है। उसे किसी अन्य लोक में मुक्ति खोजने की आवश्यकता ही क्या है?

मुक्ति की चाह भी एक सूक्ष्म बंधन है: मोक्ष की लालसा भी अंततः मन की एक ‘इच्छा’ ही है। जब तक मन में कुछ भी पाने की लालसा शेष है, चाहे वह मुक्ति ही क्यों न हो, तब तक परम शांति नहीं मिल सकती।

सच्ची स्वतंत्रता संसार से भागने में नहीं, बल्कि संसार के बीच रहकर, अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए भी भीतर से निरंतर स्व में स्थिर रहने में है।

निष्काम कर्म ही जीवन-मुक्ति: भगवान श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन को युद्धभूमि से भागकर संन्यासी बनने की अनुमति नहीं दी थी, बल्कि उसे उसके धर्म और कर्तव्य का बोध कराकर कर्म में प्रवृत्त किया था।

भागना बहुत सरल है, किंतु संसार के कोलाहल और चुनौतियों के बीच रहकर, अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाते हुए भीतर से कमल के पत्ते की भाँति निर्लेप रहना ही अष्टावक्र और गीता का सच्चा संदेश है।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

Share your love
yogeshmishralaw
yogeshmishralaw
Articles: 2614

Newsletter Updates

Enter your email address below and subscribe to our newsletter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *