भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा होने की वजह से उन्हें सोम और चंद्रशेखर भी कहा जाता है, लेकिन भगवान शिव ने चंद्रमा को सिर पर धारण क्यों किया !
इस विषय में पुराणों में दर्जनों तरह की कहानी मिल जाती है, लेकिन कोई भी कहानी वैज्ञानिक दृष्टि से शैव जीवन दर्शन के निकट नहीं है !
आज हम इस विषय पर शैव जीवन दर्शन के अनुसार विशेष चिंतन करेंगे !
चंद्रमा को मन का कारक माना गया है और भगवान शिव तंत्र के अनादि आचार्य हैं और तंत्र मानसिक शक्तियों का विषय है !
भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा होना इस बात की सूचना है कि यदि आप अपने मन को नियंत्रित करने की कला जानते हैं, तो हम मानसिक शक्तियों से इस सृष्टि में कोई भी असंभव से असंभव कार्य संभव कर सकते हैं !
जैसे हलाहल विष (अग्नी तत्व ) को पीने के बाद भी जीवित बने रहना ! माता गंगा ( जल तत्व ) को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाते समय जल के परम वेग से पृथ्वी ( पृथ्वी तत्व ) के नष्ट हो जाने की संभावना पर अपनी मानसिक शक्तियों से गंगा के उस परम वेग को अपने नियंत्रण में ले लेना और पृथ्वी की रक्षा कर लेना !
शांभवी मुद्रा द्वारा मन की चंचलता ( वायु तत्व ) को नियंत्रित कर लेना और मृतसंजीवनी विद्या द्वारा काल अर्थात् ( आकाश तत्व ) को नियंत्रित कर लेना आदि आदि !
अर्थात तांत्रिक विधान में मन के ऊर्जा के नियंत्रण की विशेष भूमिका है ! इसके उपरांत ही तंत्र से असंभव कार्य संभव हो पाते हैं ! इसीलिए भगवान शिव ने मन के प्रति चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है !
अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति मन की ऊर्जा को नियंत्रित कर लेता है, वह इस सृष्टि में भगवान शिव द्वारा बतलाये गये तंत्र विधान से असंभव से असंभव कार्य भी संभव कर लेता है !
यही भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा होने का रहस्य है ! इसीलिये शिव के सभी त्योहार और पर्व चान्द्रमास पर ही आधारित होते हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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