जब पूरी दुनियां प्रथम विश्व युद्ध की तैय्यारी कर रहा था ! तब रबींद्रनाथ ने पहली बार वर्ष 1900 में अपनी पत्नी से कहा कि वह एक स्कूल खोलना चाहते हैं, तो उनकी पत्नी मृणालिनी देवी की हँसी नहीं रुकी !
वैसे स्वयं रबींद्र नाथ टेगौर का पढ़ाई में मन कभी नहीं लगा ! वह एक विचारक ही नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तक होने के साथ साथ स्वतन्त्र विचारक भी थे ! जिनसे अल्बर्ट आइंस्टीन भी मिलने के उत्सुक रहे और दोनों के मध्य भेंट और संवाद भी हुआ !
प्रेसीडेंसी कॉलेज में उनकी पढ़ाई की अवधि महज़ एक दिन थी ! लंदन बैरेस्टरी पढ़ने भेजा गया, तो नाटक की पांडुलिपी के साथ वापस आ गए ! दूसरी बार फिर भेजा गया, तो बीच रास्ते में जहाज़ से उतरकर चंद्रनगर चले गए !
घर वालों ने मान लिया कि लड़का बाकी भाइयों जितना विद्वान नहीं निकलेगा ! ऐसे में रबींद्रनाथ का सबकुछ दाँव पर लगाकर स्कूल खोलना किसी अजूबे से कम नहीं था, लेकिन रबींद्रनाथ महज़ एक स्कूल नहीं खोलना चाहते थे !
उनके लिए शांतिनिकेतन मात्र एक विद्यालय नहीं बल्कि वह व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र था ! जिसमें रटने वाली प्रवत्ति और बंद दीवारों के बीच ज्ञान बाँटने से अलग शिक्षा व्यवस्था थी !
रबींद्र नाथ टेगौर का मानना था कि भारत के लिए शिक्षा का पाश्चात्य तरीका सही नहीं था ! उन्होंने एक योजना बनाई और उसे सफ़लतापूर्वक पूरा भी किया !
हालाँकि, शांतिनिकेतन ने उन्हें निजी जीवन में असीम दुखों से भर दिया ! लेकिन शांतिनिकेतन की सफ़लता को उसके छात्रों के ज़रिए समझा जा सकता है !
शांतिनिकेतन के सफल छात्रों की सूची बड़ी लंबी है ! जिसमें ऑस्कर विजेता फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे से लेकर
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन जैसे लोग हैं !
भारत की सफलतम राजनीतिज्ञ प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से लेकर गौरापंत शिवानी, महाश्वेता देवी, हफ़िंग्टन पोस्ट की संस्थापक एरियाना हफ़िंग्टन भी है !
रामकिंकर बैज, केजी सुब्रमण्यम, मृणालिनी साराभाई हैं, महारानी गायत्री देवी हैं, साहित्यकार हज़ारी प्रसाद द्विवेदी, नंदलाल बोस, अमिय चक्रवर्ती, बाबू बनारसीदास चतुर्वेदी और बलराज साहनी जैसे शिक्षकों की लंबी सूची है !
इन सबके अलावा शांतिनिकेतन वह जगह थी, जिसने साहित्य की दुनिया का परिचय धर्मनिरपेक्ष विचारक कबीर के साथ करवाया था !
हालाँकि रवीन्द्रनाथ के पिता देवेंद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1863 में सात एकड़ जमीन पर एक आश्रम की स्थापना की थी ! वहीं आज विश्वभारती है ! रवीन्द्रनाथ ने 1901 में सिर्फ पांच छात्रों को लेकर यहां एक स्कूल खोला ! इन पांच लोगों में उनका अपना पुत्र भी शामिल था ! 1921 में राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा पाने वाले विश्वभारती में इस समय लगभग छह हजार छात्र पढ़ते हैं !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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