1950 से 1970 के दशक के बीच शीत युद्ध की तैय्यारी के दौरान अमेरिका की सी.आई.ए. एजेंसी द्वारा एक बहुत ही कुख्यात ‘माइंड कंट्रोल’ प्रोग्राम’ पर शोध कार्य किया गया !
जिसे अमेरिका के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. इवेन कैमरून ने ‘साइकिक ड्राइविंग’ शोध कहा ! इस शोधों का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि मानव मस्तिष्क के स्वतंत्र सोचने की क्षमता को कैसे नष्ट किया जा सकता है और स्वतन्त्र विचारकों को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।
शोध में यह पाया गया कि यदि किसी भी व्यक्ति को एक ही वाक्य या संदेश को लगातार, बिना रुके, घंटों तक बोला, कहा या सुनाया जाता था। तो इस निरंतर एक ही विचार/ध्वनि के प्रवाह से व्यक्ति की पुरानी यादें, तार्किक क्षमता और स्वयं का व्यक्तित्व पूरी तरह से नष्ट हो जाता है।
व्यक्ति गंभीर ‘मानसिक शून्यता’ और भ्रम की स्थिति में चले जाता है। उनका मस्तिष्क खाली स्लेट की तरह हो जाता है, जिस पर षड्यंत्रकारी एजेंसी कोई भी नई बात आसानी से थोप सकती हैं।
इसी शोध को भारत में लागू करने के लिये भारत में हजारों महत्वाकांक्षी अनपढ़ संतों पर शोध कर उनकी सूची बनाई गयी ! उनमें से कुछ को चुना गया और उन्हें प्रचारित करने के लिये बड़े बड़े फिल्म स्टार और खिलाडियों को एक योजना के तहत उनके पास भेजा गया !
फिर इन्हीं फिल्म स्टारों और खिलाडियों के उस तथाकथित सन्त के मिलने का सोशल मिडिया और डिजिटल प्रिंट मिडिया पर खूब जोर शोर से प्रचार किया गया ! बाहर से देखने में सब स्वाभाविक लगता है पर इस पूरे लोकप्रियता कांड के पीछे बड़ी बड़ी विदेशी एजेंसियां फंडिंग कर रही हैं !
उद्देश्य एक मात्र है भारतीय हिन्दू समाज को विचार शून्य बनाना ! इसीलिये इन तथाकथित संतों के नाम कोई सम्पत्ति या वाहन आदि नहीं होता है ! भले ही वह 2-2 करोड़ की गाड़ियों में घूमते हैं, करोड़ों के आश्रम में अपने तथाकथित दर्जनों सेवकों के साथ पूर्ण सुविधाओं से रहते हैं ! पर इन सन्तों के नाम कुछ नहीं होता है !
इनके संस्थान में दर्जनों सेवकों के मध्य वह पढ़े लिखे विदेशी एजेंट भी होते हैं, जिनके इशारे पर ऐसे तथाकथित अनपढ़ सन्त अपने नाम जप की दुकान चलाते हैं ! इन्हीं एजेंटों के द्वारा बनाई योजना के तहत सोशल मिडिया पर लोक लुभावने वीडियो शूट करके डलवाये जाते हैं ! इनकी फोटो और मूर्ति बना कर बेचीं जाती है !
इसी रहस्य को रहस्य बनाये रखने के लिये स्वामी जी के कमरे में आग लग जाने पर भी किसी भी व्यक्ति को उस कमरे में प्रवेश को आज्ञा नहीं दी जाती है, ऐसी ही एक घटना अभी हाल में वृंदावन के एक बहुप्रसिद्ध तथाकथित नाम जप सन्त के साथ हुई है !
इस विषय पर सूचना एजेंसियों को निगाह रखनी चाहिये, जिससे देश और धर्म दोनों की रक्षा हो सके !!
योगेश कुमार मिश्र
अधिवक्ता, लखनऊ
