भारतीय परिवेश में वैष्णव जीवन दर्शन को अपनाने वाले धन प्राप्ति को प्रारब्ध का विषय मानते हैं !
जबकि विश्व के दूसरे जीवन दर्शन को मानने वाले धन प्राप्ति योजनाबद्ध भयंकर संघर्ष का विषय मानते हैं !
इसीलिए जहां भारतीय जीवन दर्शन में धन प्राप्ति के लिए पूजा पाठ करके अपने प्रारब्ध को सुधार कर भगवान की कृपा से धन प्राप्त करने का विधान है !
वहीं विश्व के दूसरे जीवन दर्शन में धन कामना भाग्य या भगवान का विषय नहीं है, बल्कि दूरदर्शी योजना बना कर उस योजना को क्रियान्वित करने के लिये भयंकर पुरुषार्थ को करने की बात कही जाती है !
यही सिद्धान्त शायद उनकी आर्थिक संपन्नता का आधार है !
जब हम अपनी गरीबी के लिए अपने भाग्य और भगवान को कोसते हैं, तब उसी समय में विश्व के दूसरे जीवन दर्शन को मानने वाले लोग पुरुषार्थ की शक्ति से धन कमा लेते हैं !
धन सदैव विस्तृत भविष्यदर्शी योजना के निर्माण और उसके व्यवहारिक और स्थिर क्रियान्वयन से आता है !
कोई भाग्य या भगवान आपके धन कमाने में सहायक नहीं है ! आपकी अपनी आर्थिक समझ के प्रति बौद्धिक परिपक्वता, व्यवहारिक आर्थिक समझ, क्रमबद्ध योजनाओं का निर्माण और आपका अपनी योजनाओं के प्रति समर्पण ही आपको संपन्न बन सकता है ! अन्य कोई भाग्य या भगवान आपको संपन्न नहीं बनता है !
इसलिए संपन्न होने के लिए धन के आकर्षण की वृत्ति को समझिए और अपनी वृत्ति को धन आकर्षण की वृत्ति के अनुरूप बनाकर संपन्न होइये, यही एकमात्र संपन्नता का रहस्य है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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