सांसारिक तत्व की साधना करें या ऊर्जा की : Yogesh Mishra

दुनिया दो तरह से चलती है, एक तात्विक और दूसरा आध्यात्मिक !

 तात्विक दुनिया को मनुष्य इंद्रियों से सहज महसूस किया जा सकता है ! यह भौतिक है, जो दूसरों को दिखाई देती है ! यहां पर अनंत संभावनाएं हैं और इन्हीं अनंत संभावनाओं को खोजने का कार्य भौतिक विज्ञान करता है और जब वह किसी संभावना को सूत्र रूप में खोज लेता है, तब उसे अविष्कार कहते हैं !

 अर्थात जब यह सिद्ध हो जाता है कि इस तत्व का इस तरह से सर्वमान्य प्रयोग किया जा सकता है, तो उसे कोई भी व्यक्ति किसी भी समय करेगा, तो उसका एक जैसा ही परिणाम होगा ! यह तात्विक निष्कर्ष है ! जिसमें दुनिया की सभी भौतिक चीजों आती हैं !

 इसके विपरीत एक आध्यात्मिक दुनिया होती है ! जहां पर किसी भी चीज को इंद्रिय से महसूस नहीं किया जा सकता है ! बल्कि यह विशुद्ध अनुभूति का विषय है ! यहां पर कोई भी चीज भौतिक रूप में दिखाई नहीं देती है !

लेकिन वह अपने ओरे के प्रभाव से इस दुनिया पर अपना असर डालती है और धीरे-धीरे ओरे का यह प्रभाव व्यक्ति ही नहीं, भौतिक वस्तुओं के भी गुण-धर्म को बदल देता है !

 जिससे संसार ही नहीं प्रकृति की व्यवस्था भी बदल जाती है, इस तरह कहा जा सकता है कि तात्विक शक्तियों से एक निश्चित सीमा तक परिवर्तन किया जा सकता है, किंतु यदि आध्यात्मिक शक्ति से कोई परिवर्तन किया जाये तो वह अनंत, असीम प्रभाव छोड़ती है !

 इसलिए संसार में निर्वाह के लिए जितना जरूरी है, उतना ही तत्वों का संग्रह कीजिए ! शेष जीवनी ऊर्जा को तत्वों के पीछे न लगाकर आध्यात्मिक ऊर्जा को विकसित करने में लगाईये, क्योंकि यदि आप की आध्यात्मिक ऊर्जा व्यवस्थित तरीके से विकसित हो गयी, तो इस संसार के सभी तत्व स्वतः आप की ओर आकर्षित होते चले जाएंगे, यही पूर्ण पुरुषों के सफलता का रहस्य है और यही प्रकृति की व्यवस्था है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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