आपने देखा होगा कि अपने जीवन में बहुत से लोग बहुत ही अधिक प्रतिभावान होते हैं और कुछ पर ईश्वर की इतनी कृपा होती है कि उनके पास सभी तरह के संसाधन मौजूद होते हैं, लेकिन इसके बाद भी ऐसे लोग अपने जीवन में बहुत अधिक सफल नहीं हो पाते हैं !
इसका क्या कारण है, गहराई से विचार करने पर पता चलता है कि यह मात्र विचारों के बिखराव ही हमें जीवन में असफल बनाता है !
क्योंकि बिखरे हुए व्यक्तित्व का व्यक्ति प्रतिभा और संसाधनों के बाद भी अपने जीवन को कोई दिशा नहीं दे पाता है !
अब प्रश्न यह है कि विचारों में बिखराव होता क्यों है ?
इस के मुख्य दो कारण हैं ! पहला आपके अपने संस्कार के विपरीत परिवेश के दबाव में लिया गया निर्णय और दूसरा आपके गलत सलाहकार !
जब व्यक्ति किसी भी कार्य को करने का निर्णय लेता है, तो व्यक्ति प्राय: परिवार, परिवेश या समाज के दबाव और निर्णयों से प्रभावित होकर वह अपने संस्कारों के विपरीत कार्य करने का निर्णय ले लेता है !
इसी का परिणाम है कि व्यक्ति प्रतिभा और संसाधन संपन्न होने के बाद भी अपने संस्कारों के विपरीत कार्य करने के कारण जीवन में असफल हो जाता हैं !
और फिर इस असफलता को सफलता में बदलने के लिए व्यक्ति तरह-तरह के वाह्य संसाधनों का प्रयोग करता है !
जैसे कि मोटिवेशनल स्पीकर के वर्कशॉप करने लगता है या फिर किसी अन्य देश के लेखकों की विश्व प्रसिद्ध मार्गदर्शक किताबें पढ़ने लगता है !
प्राय: ऐसे दिग्भ्रमित व्यक्ति यह मानते हैं कि दूसरा व्यक्ति जिस तरह से सफल हुआ है शायद हम भी उसी मार्ग पर चलकर सफल हो सकते हैं लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है !
अपनी प्रवृति के अनुसार यदि आप कार्य नहीं कर रहे हैं तो आपके जीवन में सफल होने की संभावना बहुत कम हो जाती है !
क्योंकि जब आप अपनी प्रवृत्ति के अनुसार कार्य करते हैं तो ईश्वरीय शक्तियां भी आपके कार्य में सहयोग करने लगती हैं और आप कम परिश्रम में ही सफल हो जाते हैं !
लेकिन जब आप समाज, परिवेश, परिवार, अव्यवहारिक सलाहकार के परामर्श पर कार्य करते हैं, तो आप अपने जीवन में प्रतिभा और संसाधन रखते हुये भी असफल ही रह जाते हैं !
क्योंकि इससे आपके जीवन में कार्य और विचार आप की प्रवृति के विपरीत होने के कारण आपको एक लक्ष्य पर केंद्रित नहीं होने देते हैं और यह विचारों का बिखराव ही आपको आपके जीवन में असफल बना देता है !
इसलिये यदि आप सफल व्यक्ति बनना चाहते हैं तो अपने कार्य और विचारों को बिखराव से रोकते हुए अपनी प्रवृति के अनुसार बनाइये ! यही जीवन में सफल होने का मनोवैज्ञानिक सूत्र है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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