आज मैंने रात में एक सपना देखा !
जिसमें विश्व के सात बड़े विद्वान जो भविष्य में दुनिया को अपने नियंत्रण में करना चाहते थे, उनकी एक गुप्त वार्ता सपने में सुनी !
उन 7 बड़े विद्वानों का यह मत था कि द्वितीय विश्व युद्ध हो चुका है, लेकिन अगर आगे दुनिया को नियंत्रित करना है, तो अब हथियारों से लड़ाई संभव नहीं है, क्योंकि विज्ञान के विकसित होने के साथ-साथ पूरी दुनिया में कई देशों ने हथियारों को विकसित कर लिये हैं !
इसलिए आने वाले समय में यदि हम विश्व पर नियंत्रण बनाये रखना चाहते हैं, तो अब हमें हथियारों को छोड़कर मनुष्य के मस्तिष्क को नियंत्रित करना होगा !
इसके लिए हमें एक ऐसा डिजिटल प्लेटफार्म बनाना पड़ेगा, जिस पर विश्व के सभी इंटेलेक्चुअल क्लास के लोग अपने विचार स्वप्रेरणा से डालें ! जिससे हमें पता चले कि दुनियां में कौन क्या सोच रहा है और समाज के दूसरे लोग जो उन विचारों को सुने उससे हमें पता चले कि समाज का उस विचार को कितना समर्थन प्राप्त है और कौन कौन लोग उस विचार का समर्थ कर रहे हैं !
इस तरह विचारों को डालने वाले और विचारों को सुनने वाले दोनों का डाटा हमारे पास होगा, इसके लिए हम उन बुद्धजीवियों को विचार डालने के बदले कुछ पैसे का लालच भी दे सकते हैं !
इसके लिए पूरी दुनिया को एक प्लेफार्म पर लाने के लिये डिजिटल किया जाना भी जरूरी था, इसीलिए पूरी दुनिया को एक तार से जोड़ने की नि:शुल्क व्यवस्था लाई गयी, जिसे हम इंटरनेट कहते हैं !
अब हम उस इंटरनेट के दौर में फंस कर पूरी तरह से गुलाम बन चुके हैं, जिसका परिणाम है कि अब विश्व का प्रबुद्ध वर्ग बतलाता है रोटी, कपड़ा और मकान के बाद चौथी जरूरत इंटरनेट है ! लेकिन सच यह है कि अगर आज किसी व्यक्ति के पास इंटरनेट नहीं है, तो वह अपने रोटी, कपड़े और मकान को भी सुनिश्चित नहीं कर सकता है !
और आज स्थिति यह है कि अब बौद्धिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक, संवैधानिक युद्ध में क्या दिखाया जाना है, क्या नहीं, यह एक विशेष संस्था डिसाइड करती है, जो समाज और मनुष्य दोनों के मस्तिष्क को नियंत्रित कर रही है ! अब वह संस्था ही यह निर्णय लेती है कि भविष्य का मानव मस्तिष्क कैसा होना चाहिये !
अर्थात अब आने वाले युग में युद्ध हथियारों से नहीं बल्कि सूचना आधारित मानव मस्तिष्क की कल्पनाओं को स्वरूप देने वाली संस्थाओं के माध्यम से जीते या हारे जाएंगे !
भारत ने अभी तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया है ! अगर भारत को भविष्य में महाशक्ति बनना है, तो भारत को भी इस दिशा में गंभीरता से कार्य करना होगा क्योंकि अब केन्द्रीय सूचना तंत्र के कोई भी देश अपने नागरिकों के मस्तिष्क को भविष्य के लिये तैय्यार नहीं कर सकता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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