अष्ट लक्ष्मी का रहस्य
हिंदू समृद्धि की देवी अष्ट लक्ष्मी के आठ रूपों का एक समूह है। जिसका परिणाम आपके जीवन की सफलता, सार्थकता, संपन्नता और उपयोगिता है ।
इसलिये इस अष्ट लक्ष्मी के रहस्य को गंभीरता से जानना बहुत जरुरी है !
अष्ट लक्ष्मी आराधना से धन कमाना मात्र एक परिणाम है, किंतु धन कमाने के लिए व्यक्ति को जीवन में आठ बाधाओं को क्रॉस करना पड़ता है ! तब व्यक्ति अपने जीवन में सफल, समृद्ध और संपन्न बनता है !
जिसके लिये कुंडली के आठ भाव का निरिक्षण किया जाता है और इन आठों भाव की ऊर्जा में संतुलन होना परम आवश्यक है ! तभी व्यक्ति जीवन में सफल होता है !
अन्यथा पहले तो व्यक्ति का धन कमाने योग्य स्वास्थ्य ही नहीं होता है, दूसरा वह धन के लिये पराक्रम ही नहीं करना चाहता है, तीसरी बाधा धन कमाने के अवसर सामने होते हैं, पर वह उसका लाभ नहीं उठा पाता है, उसे धन कमाने में शासन सत्ता का सहयोग नहीं मिलता है !
या उसका कमाया हुआ धन उसके गलत निर्णय के कारण नष्ट हो जाता है या फिर उसके अपने पुत्र, मित्र, रिश्तेदार आदि उससे उसके धन को छीन लेते हैं या फिर आपस में लड़ झगड़ कर नष्ट कर देते हैं !
कुछ व्यक्तियों पर विशेष परिस्थिति में गुप्त शत्रुता रखने वाले लोग तंत्र आदि का प्रयोग करके उसे व्यक्ति की अर्जित संपत्ति को नष्ट कर देते हैं और व्यक्ति समझ ही नहीं पता है कि ऐसा हो क्यों रहा है !
अत: व्यक्ति को अपनी कुंडली के आठ भाव का निरिक्षण किसी योग्य ज्योतिषी साधक तांत्रिक आचार्य गुरु से अवश्य करवाना चाहिये !
जिसके लिये कुण्डली के 1,2,3,4,5,9, 10 और 11 भाव की ऊर्जा का संतुलन देखना परम आवश्यक है ! जिसे अष्ट भावेश ऊर्जा संतुलन के सिधान्त से देखा जाता है !
और यदि उसके इन आठ भावों के ऊर्जा संतुलन में कोई बाधा है, तो उसके निवारण के लिए उस व्यक्ति को विशिष्ट अनुष्ठान अवश्य करवाना चाहिए ! अन्यथा जीवन भाव संघर्ष बना रहता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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