हमारे हाथ के अंदर 14 स्थान पर विशेष मर्म बिंदु होते हैं और समस्त शरीर में 107 मर्म बिंदु होते हैं ! जिन्हें तंत्र के जानकार अलग-अलग मुद्रा को स्थापित करके उन बिंदुओं से शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं !
जिससे शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक चेतना के स्तर में अंतर आता है ! इससे जीवनी ऊर्जा की मदद से किसी दूसरे के ऊर्जा प्रवाह को हजारों किलोमीटर दूर से नियंत्रित किया जा सकता है !
अर्थात सामान्य मुद्रा तंत्र में व्यक्ति का व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना परम आवश्यक है !
किन्तु ब्रह्मास्मि क्रिया योग के मुद्रा तंत्र में व्यक्ति का किसी भी तरह से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना आवश्यक नहीं है ! बल्कि यह तंत्र मुद्रा चिकित्सा हजारों किलोमीटर दूर से बैठकर भी की जा सकती है !
बस आवश्यकता है, कुछ विशेष साधना के अभ्यास करने की !
यदि व्यक्ति स्वयं को विशेष अभ्यास के द्वारा तैयार कर ले, तो वह किसी भी व्यक्ति के दैहिक, दैविक और भौतिक किसी भी तरह के कष्ट को हजारों किलोमीटर दूर से ही ठीक कर सकता है !
यह अंतर है सामान्य मुद्रा तंत्र तथा ब्रह्मास्मि मुद्रा तंत्र में !
इस हेतु विशेष अभ्यास कक्षाएं आरंभ की जा रही हैं, यदि कोई साथी इन कक्षाओं में जुड़ना चाहता है, तो वह कार्यालय में संपर्क करके इन कक्षयों में जुड़ सकता है !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
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www.sanatangyanpeeth.in
