( विशेष लेख )
प्राय: जीवन में असफल लोगों की यह शिकायत होती है कि मैंने जब भी कोई कार्य शुरू किया, तब वक्त ने मेरा साथ नहीं दिया ! वरना मैं भी सफल हो जाता !
ऐसे साथियों को मैं यह बतलाना चाहता हूं कि वक्त कभी किसी का साथ नहीं देता है !
वक्त एक जिद्दी गाय की तरह होता है, जो सहज किसी को सफलता रूपी दूध नहीं देना चाहता है ! वक्त को पहले अपने अनुकूल बनाना पड़ता है, तब उससे सफलता रूपी दूध निकाला जाता है !
जो वक्त को अनुकूल बना कर इससे सफलता रूपी दूध निकालने की कला नहीं जानता है, वह जीवन में कभी सफल नहीं हो पाता है और इसीलिये जो व्यक्ति वक्त के जिद्दी होने से घबराकर उससे दूर हो जाता है, वह जीवन में असफल ही रह जाता है !
क्योंकि भगवान शिव ने इस माया क्षेत्र में जीव को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी “वक्त” अर्थात “काल” को दी है, इसीलिए वक्त हमें प्रशिक्षित करने के लिये हमारे साथ इतना कठोर व्यवहार करता है ! जिससे हम इस माया क्षेत्र में प्रशिक्षित होकर “कालजयी” बना सकें !
दूसरे शब्दों में “कालजयी व्यक्ति ही जीवन में सफल हो सकता है !” और जो व्यक्ति वक्त के प्रशिक्षण से घबरा जाता है, वह पूर्व के जीवन में असफल था, इसीलिये इस जीवन में पैदा हुआ और फिर वक्त के प्रशिक्षण से घबड़ा गया, इसिलये इस जीवन में असफल ही मर जायेगा ! और इसी तरह वह पुन: भटक – भटक कर बार बार इस जीवन मारण के चक्र में फंसा रहेगा !
अर्थात मुक्ति या मोक्ष का एक ही मार्ग है, काल के प्रशिक्षण को पूरा कर के “कालजयी” बनो, तभी तुम मुक्त होगे, तभी तुम्हें मोक्ष मिलेगा !
मैंने बहुत से महान व्यक्तियों का जीवन परिचय पढ़ा है ! सभी महान व्यक्तियों के जीवन में एक घटना सामान्य है, कि “मौके पर कभी वक्त ने किसी का साथ नहीं दिया !” फिर भी उन्होंने हर परिस्थिति में अपनी सूझबूझ, समझ और धैर्य से वक्त को अपने अनुकूल बनाया है, इसीलिए वह महान बन पाये हैं !
अगर हमें भी अपने जीवन में सामान्य से श्रेष्ठ बनना है, तो हमें वक्त को अपनी सूझबूझ और धैर्य से अपने अनुकूल बनाना होगा ! अन्यथा यदि हम अनुकूल वक्त का इंतजार करते रहेंगे, तो आयु खत्म हो जाएगी और वक्त कभी अनुकूल नहीं होगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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