एक स्वस्थ्य चित्त व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से सक्षम होता है। उसकी शारीरिक व मानसिक ऊर्जा जीवन के अंतिम समय तक अच्छी होती है । वह स्वयं में मानसिक शांति से परिपूर्ण और आत्म संतोषी होता है।
क्या आप स्वस्थ्य चित्त के व्यक्ति हैं, इसके परिक्षण के सात मानक हैं। अपनी परीक्षा स्वयं कीजिये।
पहला मानक – स्वस्थ्य चित्त का व्यक्ति ईश्वरीय व्यवस्था में विश्वास रखता है, वह मानव निर्मित किसी भी व्यवस्था में नहीं बंधता है।
दूसरा मानक – वह अति वादी नहीं होता है। वह निर्वाह योग्य संसाधन में जीवन निर्वाह करता है। उसमें संग्रह या प्रतिस्पर्धा के भाव से मुक्त होता है।
तीसरा मानक – वह सर्वस्व को स्वीकार करता है। उसका किसी के प्रति कोई द्वेष, घृणा या शत्रुता का भाव नहीं होता है। उसके इस सृष्ठी में सभी मित्र हैं। वह कभी भी व्यर्थ के शाररिक, मानसिक या सामाजिक युद्ध में नहीं उलझता है।
चौथा मानक – उसमें स्वयं में अपने पद, प्रतिष्ठा, धन, ज्ञान आदि का कोई अहंकार नहीं होता है। वह लोक कल्याण के लिये छोटा से छोटा कार्य भी प्रसन्नता पूर्वक करता है।
पांचवां मानक – वह किसी को, कहीं भी, कितने भी बड़े अपराध के लिये माफ़ कर सकता है। उसके लिये कोई छोटा – बड़ा नहीं होता है। कोई अपना पराया नहीं होता है। वह महोपनिषद् का सूत्र “वसुधैव कुटुंबकम” का अनुयायी होता है।
छठां मानक – वह मात्र आत्मिक मनोरंजन के लिये कोई कार्य नहीं करता है। जैसे चुगली करना, किसी को मानसिक या शाररिक रूप से प्रताड़ित करना, अनावश्य किसी को प्रशिक्षित करना आदि।
सातवां मानक – उसको सभी के समग्र विकास से आतंरिक प्रसन्नता होती हैं। वह किसी के विकास को देख कर ईष्या या हीन भावना से ग्रसित नहीं होता है !
यह स्वस्थ्य चित्त व्यक्ति के लक्षण हैं। क्या आप स्वस्थ्य चित्त के व्यक्ति हैं। इसका परीक्षण स्वयं कीजिये।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये
www.sanatangyanpeeth.in
